ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी को माँ गायत्री के प्राकट्य का पावन उत्सव मनाया जाता है। भारतीय संस्कृति में माता गायत्री को सृष्टि की जननी तथा वेदों की जन्मदाता माना गया है; इसीलिए वह “वेदमाता” के नाम से भी विख्यात हैं। कहा जाता है कि गायत्री मंत्र ही वेदों का सार है। माता की कृपा से भगवान ब्रह्मा ने अपने चारों मुखों से इस मंत्र की व्याख्या करते हुए चारों वेद प्रकट किए। प्रारम्भ में गायत्री की महिमा केवल देवलोक तक सीमित थी, किंतु महर्षि विश्वामित्र ने कठोर तपस्या द्वारा इसे जन-जन तक पहुँचाया। अथर्ववेद में माँ गायत्री को आयु, प्राण, शक्ति, कीर्ति, धन और ब्रह्मतेज प्रदान करने वाली देवी बताया गया है; अतः इस एकादशी पर उनका स्मरण और पूजन साधक को सर्वांगीण कल्याण का वरदान देता है।