हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी को रखा जाने वाला कालाष्टमी व्रत, बाबा कालभैरव की उपासना के लिए विशेष माना गया है। शास्त्रों में वर्णित है कि इस दिन श्रद्धा से भैरव जी और माँ दुर्गा का पूजन करने से कुंडली के अशुभ ग्रह-नक्षत्र शांत हो जाते हैं और जीवन के बड़े-से-बड़े संकट भी टल जाते हैं। नारद पुराण स्पष्ट कहता है कि कालाष्टमी की साधना सभी मनोकामनाएँ पूरी करने का सुगम मार्ग है। यही तिथि भैरव-जन्मोत्सव भी है; लोकपाल कहे जाने वाले भैरव दसों दिशाओं की रक्षा करते हैं। मान्यता है कि जो सच्चे हृदय से उनका शरणागत होता है, उसका अहित चाहने वाले को तीनों लोकों में कहीं शरण नहीं मिलती। इस व्रत का सार यही है—आस्था, संयम और भैरव-कृपा से भय और बाधाएँ स्वयं मिट जाती हैं।