हिन्दू व्रत एवं त्यौहार - BhaktiSarovar.in

ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत

19 जून 2027 · शनिवार ज्येष्ठ, शुक्ल पूर्णिमा

ज्येष्ठ पूर्णिमा का व्रत कब है?

संक्षिप्त उत्तर

ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत 2027 कब है?

ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत 2027 शनिवार, 19 जून 2027 को मनाई जाएगी। ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत की तिथि ज्येष्ठ, शुक्ल पूर्णिमा है। ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त 05:08 – 07:52 तक रहेगा।

दिनांक19 जून 2027
तिथिज्येष्ठ, शुक्ल पूर्णिमा
पूजा मुहूर्त05:08 – 07:52
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिज्येष्ठ, शुक्ल पूर्णिमाज्येष्ठ माह के व्रत-त्योहार
मुख्य देवताDevi Savitri
वार-देवताशनि देवशनिवार
नक्षत्रमूलशुभ
संक्षिप्त परिचय

ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत का महत्व और उत्सव

ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत ज्येष्ठ, शुक्ल पूर्णिमा तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है। इस दिन Devi Savitri की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि एवं रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)शुक्ल पूर्णिमा
नक्षत्रमूल
योगशुभ
करणबव
ऋतुग्रीष्मउत्तरायण
संवत्सररौद्र
दिशा शूलपूर्वअदरक या तिल खाकर

ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 03:32 – 04:20 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 05:08 – 07:52 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:32 – 12:26 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 17:01 – 17:56 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 18:03 – 19:15 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 08:33 – 10:16 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 18 Jun 04:34 AM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 03:32–04:20
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 05:08–07:52
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:32 – 12:26
तिथि समाप्त 19 Jun 06:13 AM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 18:03–19:15

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत — महत्व, कथा और परंपरा

ज्येष्ठ पूर्णिमा का व्रत मुख्यतः विवाहित महिलाएँ रखती हैं। महाराष्ट्र, गुजरात तथा दक्षिण भारत के अनेक प्रदेशों में यह उपवास विशेष महत्त्व रखता है, जबकि उत्तर भारत में यह ही व्रत ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या को “वट सावित्री” रूप में मनाया जाता है। पूर्णिमा के दिन प्रातः स्नान कर दान-पुण्य करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं। दिन भर निर्जल या फलाहार उपवास रखते हुए स्त्रियाँ वट-वृक्ष के नीचे बैठकर विधिवत् पूजा-अर्चना करती हैं। परंपरा है कि सावित्री की भाँति वे त्रिदेव से अपने पति के दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और समृद्ध जीवन की प्रार्थना करती हैं। इस प्रकार वट पूर्णिमा नारी शक्ति के अखण्ड स्नेह, तप और मंगल-कामना का दिव्य प्रतीक बन जाता है।

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिज्येष्ठ, शुक्ल पूर्णिमा
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
आराध्य देवDevi Savitri
माह पद्धतिपूर्णिमांत (उत्तर भारत)
अंतिम संशोधन05 Sep 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा शास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

गूगल पर भक्ति सरोवर को पसंदीदा स्रोत बनाएं

1गूगल पर खोजें 2हमारा लिंक ढूँढें, ⋮ मेनू दबाएं 3"More from this site" चुनें पसंदीदा स्रोत बनाएं →
सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2027 में ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत 19 जून 2027 (शनिवार) को है।
ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत ज्येष्ठ, शुक्ल पूर्णिमा तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
!

अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।