ज्येष्ठ शुक्ल नवमी का दिन महेश नवमी के रूप में श्रद्धापूर्वक मनाया जाता है। यद्यपि यह पर्व सम्पूर्ण हिन्दू समाज में हर्ष के साथ मनाया जाता है, फिर भी माहेश्वरी समुदाय के लिए इसका विशेष महत्व है, क्योंकि उनकी उत्पत्ति प्रभु शिव के वरदान से इसी तिथि पर मानी जाती है। शिव, जिनका एक नाम ‘महेश’ भी है, कल्याण, मंगल और शांति के प्रतीक हैं। कहा जाता है कि उन्हीं की आज्ञा से माहेश्वरी पूर्वजों ने क्षत्रिय धर्म छोड़कर वैश्य धर्म स्वीकार किया। इस दिन देवाधिदेव शिव और जगतजननी पार्वती की आराधना कर “ॐ महेश्वराय नमः” मंत्र का जप किया जाता है। विश्वास है कि इस साधना से जीवन में कल्याण, समृद्धि और शांति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।