पितृ दिवस हर साल जून के तीसरे रविवार को मनाया जाता है। यह दिन उस निस्वार्थ प्रेम, त्याग और मार्गदर्शन का सम्मान करने का अवसर है जो पिता अपने परिवार को देते हैं। परंपरा अनुसार भारतीय घरों में बेटे-बेटियाँ सुबह पिता के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेते हैं, फिर उनका प्रिय भोजन बनता है या साथ बाहर भोजन किया जाता है। कुछ लोग स्मृति-फोटो एलबम, हस्तलिखित पत्र या छोटा-सा उपहार देकर कृतज्ञता जताते हैं। आधुनिक समय में डिजिटल कार्ड, वीडियो संदेश और वॉलेट-फ्रेंडली गिफ्ट भी प्रचलित हैं, पर भावना वही रहती है—पिता की छाया और संस्कारों का ऋण कभी चुकाया नहीं जा सकता; एक सच्चा “धन्यवाद” ही उनका सबसे बड़ा तोहफ़ा है।