आज की तिथि क्या है?
पंचांग लोड हो रहा है…
| तिथि | — |
| वार | — |
| पक्ष / माह | — |
| नक्षत्र | — |
| स्थान | वाराणसी |
आज की तिथि, पंचांग के पाँचों अंग, सूर्योदय-सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया, शुभ मुहूर्त, पंचक, भद्रा, दिशा शूल, मासिक पंचांग और वैदिक घड़ी — सब एक स्थान पर, आपके शहर के अनुसार।
आज की तिथि, पाँचों अंग और विशेष व्रत-त्योहार का संक्षिप्त विवरण। विस्तृत पंचांग के लिए "आज की तिथि" पृष्ठ देखें।
पंचांग लोड हो रहा है…
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| पक्ष / माह | — |
| नक्षत्र | — |
| स्थान | वाराणसी |
पंचांग तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण — इन पाँच अंगों से मिलकर बनता है।
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तिथि, राहु काल, चौघड़िया, मुहूर्त, दिशा शूल और मासिक पंचांग — सभी Tools एक स्थान पर।
आज का पंचांग — तिथि, नक्षत्र, योग, करण, सूर्योदय-सूर्यास्त, चंद्र-सूर्य राशि और वैदिक घड़ी।
आज का राहु काल, गुलिक काल, यमगण्ड और अभिजीत मुहूर्त — शहर के अनुसार।
दिन और रात की शुभ, अमृत, लाभ, चर, रोग, काल और उद्वेग चौघड़िया।
पूजा, यात्रा, खरीदारी और शुभ कार्य के लिए आज के मुहूर्त।
आज पंचक है या नहीं, कब आरंभ/समाप्त होगा और किन कार्यों में सावधानी रखें।
आज भद्रा (विष्टि करण) का समय और शुभ कार्यों में सावधानी के लिए मार्गदर्शन।
किस दिशा में यात्रा से बचें और परिहार उपाय — दिशा शूल कैलकुलेटर।
पूरे महीने की तिथि, चंद्र कलाएँ, व्रत-त्योहार और शुभ दिन।
पंचक और भद्रा वैदिक पंचांग के दो विशेष काल हैं, जिनमें कुछ शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं। नीचे आज की गणना-आधारित स्थिति और सटीक समय देखें।
| आज पंचक है? | — |
| प्रकार | — |
| आरंभ | — |
| समाप्ति | — |
पंचक तब लगता है जब चंद्रमा कुम्भ और मीन राशि — अर्थात् धनिष्ठा (उत्तरार्ध), शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद और रेवती — इन पाँच नक्षत्रों में भ्रमण करता है। यह लगभग 5 दिन तक रहता है। आरंभ के वार के अनुसार इसे रोग, राज, अग्नि, चोर या मृत्यु पंचक कहा जाता है। इस अवधि में दक्षिण दिशा की यात्रा, लकड़ी या ईंधन एकत्र करना, चारपाई बनाना, घर की छत डालना और दाह-संस्कार जैसे कार्य वर्जित माने जाते हैं।
| आज भद्रा है? | — |
| आरंभ | — |
| समाप्ति | — |
भद्रा वैदिक पंचांग का विष्टि करण है, जिसे शुभ कार्यों के लिए अशुभ माना जाता है। यह एक चंद्र माह में आठ बार आती है और प्रत्येक बार लगभग आधी तिथि (लगभग 5–13 घंटे) तक रहती है। भद्रा काल में विवाह, रक्षाबंधन, होलिका दहन, गृह-प्रवेश, मुंडन और नया व्यापार आरंभ करने से बचा जाता है। शास्त्रों के अनुसार भद्रा का वास स्वर्ग, पृथ्वी या पाताल लोक में होता है; पृथ्वी पर स्थित भद्रा सर्वाधिक प्रभावी मानी जाती है।
विस्तृत दैनिक पंचांग, करण और शुभ-अशुभ मुहूर्त के लिए आज की तिथि पृष्ठ देखें।
दैनिक शुभ-अशुभ समय — राहु काल, गुलिक, यमगण्ड और अभिजीत मुहूर्त।
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चौघड़िया सूर्योदय से सूर्यास्त तक और सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक — कुल 16 भागों में बँटी होती है। शुभ, लाभ, अमृत और चर चौघड़िया को नए कार्य, यात्रा, खरीदारी और शुभ आरंभ के लिए उत्तम माना जाता है। रोग, काल और उद्वेग चौघड़िया में शुभ कार्य टालने की सलाह दी जाती है। विस्तृत चौघड़िया तालिका यहाँ देखें →
प्रमुख पुनरावर्ती व्रत और त्योहारों से जुड़ें।
पंचांग क्या है, तिथि कैसे निकाली जाती है, और शहर के अनुसार पंचांग क्यों बदलता है।
पंचांग भारतीय समय-गणना की पारंपरिक पद्धति है, जिसमें तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण को मुख्य पाँच अंग माना जाता है। "पंच" अर्थात् पाँच और "अंग" अर्थात् भाग — ये पाँच घटक मिलकर किसी भी दिन का पूर्ण ज्योतिषीय चित्र प्रस्तुत करते हैं। प्राचीन काल से ही पंचांग का उपयोग व्रत, त्योहार, शुभ मुहूर्त, विवाह, गृह-प्रवेश और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों की तिथि निर्धारण में किया जाता रहा है।
तिथि सूर्य और चंद्रमा की स्थिति के कोणीय अंतर (angular distance) पर आधारित होती है। जब चंद्रमा सूर्य से 12° आगे बढ़ जाता है तो एक तिथि पूर्ण होती है। एक माह में 30 तिथियाँ होती हैं — शुक्ल पक्ष की 15 और कृष्ण पक्ष की 15। सूर्योदय के समय जो तिथि विद्यमान रहती है, वह उस दिन की प्रमुख तिथि मानी जाती है।
भारत में सूर्योदय पूर्व में पहले और पश्चिम में बाद में होता है। चूँकि पंचांग सूर्योदय पर आधारित है, इसलिए राहु काल, चौघड़िया, अभिजीत मुहूर्त और यहाँ तक कि कभी-कभी तिथि भी शहर के अनुसार भिन्न हो सकती है। इसीलिए सटीक पंचांग के लिए अपना शहर चुनना आवश्यक है।
एकादशी, प्रदोष, पूर्णिमा, अमावस्या, संकष्टी चतुर्थी और संक्रांति जैसे सभी प्रमुख व्रत-त्योहार तिथि, नक्षत्र या सूर्य-संक्रमण से जुड़े होते हैं। पंचांग इन सभी की सटीक तारीख और समय बताता है, जिससे श्रद्धालु सही दिन पूजा, व्रत और अनुष्ठान कर सकें।
भक्ति सरोवर के आज की तिथि पृष्ठ पर अपने शहर के अनुसार तिथि, नक्षत्र, योग, करण, सूर्योदय-सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया, वैदिक घड़ी और कालचक्र सहित पूरा पंचांग देखें।
हाँ, सूर्योदय और सूर्यास्त का समय स्थान के अनुसार बदलता है, जिसके कारण राहु काल, चौघड़िया, अभिजीत मुहूर्त और कभी-कभी तिथि भी शहर-विशिष्ट हो जाती है। इसलिए सटीक पंचांग के लिए शहर चुनना आवश्यक है।
तिथि (चंद्र दिन), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र (चंद्र तारामंडल), योग (सूर्य-चंद्र का योग) और करण (आधी तिथि) — ये पाँच अंग मिलकर पंचांग बनाते हैं।
राहु काल दिन का एक अशुभ समय है जिसमें शुभ कार्य जैसे विवाह, गृह-प्रवेश, यात्रा या नया आरंभ करने से बचने की सलाह दी जाती है। यह वार और सूर्योदय-सूर्यास्त के अनुसार प्रतिदिन बदलता है।
/panchang/ एक hub पृष्ठ है जहाँ से आप सभी पंचांग Tools, ज्ञान-लेख और व्रत-त्योहार तक पहुँच सकते हैं। /panchang/aaj-ki-tithi/ विस्तृत दैनिक पंचांग पृष्ठ है जहाँ पूरा पंचांग, राहु काल, चौघड़िया, वैदिक घड़ी और कालचक्र विस्तार से उपलब्ध है।
पंचक तब लगता है जब चंद्रमा कुम्भ और मीन राशि के पाँच नक्षत्रों — धनिष्ठा (उत्तरार्ध), शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद और रेवती — में भ्रमण करता है। यह लगभग 5 दिन रहता है और आरंभ के वार के अनुसार रोग, राज, अग्नि, चोर या मृत्यु पंचक कहलाता है। इस अवधि में दक्षिण यात्रा, ईंधन संग्रह और दाह-संस्कार जैसे कार्य वर्जित माने जाते हैं।
भद्रा (विष्टि करण) में विवाह, रक्षाबंधन, होलिका दहन, गृह-प्रवेश, मुंडन और नया व्यापार आरंभ करने से बचा जाता है। भद्रा एक चंद्र माह में आठ बार आती है और प्रत्येक बार लगभग आधी तिथि तक रहती है। ऊपर "पंचक और भद्रा" अनुभाग में आज का सटीक समय देखें।