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जया एकादशी

17 फरवरी 2027 · बुधवार माघ, शुक्ल एकादशी

माघ माह 2027 में जया एकादशी कब है?

संक्षिप्त उत्तर

जया एकादशी 2027 कब है?

जया एकादशी 2027 बुधवार, 17 फरवरी 2027 को मनाई जाएगी। जया एकादशी की तिथि माघ, शुक्ल एकादशी है। जया एकादशी की पूजा का शुभ मुहूर्त 06:31 – 08:47 तक रहेगा।

दिनांक17 फरवरी 2027
तिथिमाघ, शुक्ल एकादशी
पूजा मुहूर्त06:31 – 08:47
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिमाघ, शुक्ल एकादशीमाघ माह के व्रत-त्यौहार
मुख्य देवताभगवान विष्णु
वार-देवताभगवान गणेशबुधवार
नक्षत्रआर्द्राप्रीति
संक्षिप्त परिचय

जया एकादशी का महत्व और उत्सव

जया एकादशी माघ, शुक्ल एकादशी तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि एवं रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)शुक्ल एकादशी
नक्षत्रआर्द्रा
योगप्रीति
करणवणिज
ऋतुशिशिरउत्तरायण
संवत्सरसिद्धार्थि
दिशा शूलउत्तरधनिया या तिल खाकर

जया एकादशी के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 04:55 – 05:43 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 06:31 – 08:47 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:49 – 12:34 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 16:22 – 17:07 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 17:05 – 18:17 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 12:12 – 13:37 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 16 Feb 08:19 PM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 04:55–05:43
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 06:31–08:47
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:49 – 12:34
तिथि समाप्त 17 Feb 05:31 PM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 17:05–18:17

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

जया एकादशी — महत्व, कथा और परंपरा

माघ शुक्ल पक्ष की एकादशी, जिसे जया (अजा) एकादशी कहा जाता है, दुख-दरिद्रता मिटाने और कष्टों से मुक्ति दिलाने के लिए विशेष रूप से प्रशंसित है। शास्त्रों के अनुसार जो साधक इस दिन निराहार रहकर भगवान नारायण का पूजन करता है, उसे अग्निष्टोम यज्ञ के बराबर पुण्य मिलता है। प्रातः स्नान के बाद पीले वस्त्रों में केशव-मूर्ति पर तुलसी-दल, कमल व गुड़-चावल का नैवेद्य अर्पित करें और ॐ नारायणाय विद्महे, वासुदेवाय धीमहि, तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्” मंत्र का 108 बार जप करें। पद्म-पुराण सहित कई ग्रंथों में यह व्रत पाप-मुचूर्णी बताया गया है—सच्ची श्रद्धा से किया गया उपवास मन के मलिन संस्कारों को धो देता है। अंत में अन्नदान या वस्त्रदान कर व्रत पारायण करें; मान्यता है कि इससे घर-परिवार में स्थायी सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है।

आवर्ती व्रत

अन्य एकादशी तिथियाँ

सभी एकादशी तिथियाँ देखें →
नामतिथिवारपक्ष/तिथिदिन शेष
परिवर्तिनी एकादशी 22 सितंबर 2026 मंगलवार भाद्रपद, शुक्ल एकादशी 4 दिन शेष देखें
इन्दिरा एकादशी 6 अक्टूबर 2026 मंगलवार भाद्रपद, कृष्ण एकादशी 18 दिन शेष देखें
पापांकुशा एकादशी 22 अक्टूबर 2026 गुरुवार आश्विन, शुक्ल एकादशी 34 दिन शेष देखें
रमा एकादशी 5 नवंबर 2026 गुरुवार आश्विन, कृष्ण एकादशी 48 दिन शेष देखें
उत्पन्ना एकादशी व्रत 4 दिसंबर 2026 शुक्रवार कार्तिक, कृष्ण एकादशी 77 दिन शेष देखें
पौष पुत्रदा एकादशी 18 जनवरी 2027 सोमवार पौष, शुक्ल दशमी 122 दिन शेष देखें

पूरा वार्षिक कैलेंडर, व्रत विधि और पारण नियम — एकादशी हब पेज पर देखें।

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

जया एकादशी की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिमाघ, शुक्ल एकादशी
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
आराध्य देवभगवान विष्णु
माह पद्धतिपूर्णिमांत (उत्तर भारत)
अंतिम संशोधन30 Mar 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा शास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2027 में जया एकादशी 17 फरवरी 2027 (बुधवार) को है।
जया एकादशी माघ, शुक्ल एकादशी तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
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अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।