माघ शुक्ल पक्ष की एकादशी, जिसे जया (अजा) एकादशी कहा जाता है, दुख-दरिद्रता मिटाने और कष्टों से मुक्ति दिलाने के लिए विशेष रूप से प्रशंसित है। शास्त्रों के अनुसार जो साधक इस दिन निराहार रहकर भगवान नारायण का पूजन करता है, उसे अग्निष्टोम यज्ञ के बराबर पुण्य मिलता है। प्रातः स्नान के बाद पीले वस्त्रों में केशव-मूर्ति पर तुलसी-दल, कमल व गुड़-चावल का नैवेद्य अर्पित करें और “ॐ नारायणाय विद्महे, वासुदेवाय धीमहि, तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्” मंत्र का 108 बार जप करें। पद्म-पुराण सहित कई ग्रंथों में यह व्रत पाप-मुचूर्णी बताया गया है—सच्ची श्रद्धा से किया गया उपवास मन के मलिन संस्कारों को धो देता है। अंत में अन्नदान या वस्त्रदान कर व्रत पारायण करें; मान्यता है कि इससे घर-परिवार में स्थायी सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है।