भाद्रपद, शुक्ल त्रयोदशी

भाद्रपद गुरु प्रदोष व्रत

24 Sep 2026, 11:46 PM Ujjain गुरुवार
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भाद्रपद माह 2026 में गुरु प्रदोष व्रत कब है?

भाद्रपद के कृष्णत्रयोदशी पर जब दिन गुरुवार पड़ता है, तो उसे गुरुप्रदोष व्रत कहा जाता है। वर्षा थम चुकी होती है, आकाश में शरद की उजली धूप झलकने लगती है, ऐसे शांत संधिकाल में शिवपर्वती की आराधना विशेष फलदायी मानी जाती है। साधक सूर्यास्त से ठीक पहले स्नान कर “ॐ नमः शिवाय” तथा “ॐ उमाशिवाय नमः” का जप करते हुए प्रदोषकाल में घृतदीप, बिल्वपत्र, आकपुष्प और अक्षत अर्पित करता है, फिर साबुत चावल की खीर नैवेद्य रूप में समर्पित की जाती है। पुराण मानते हैं कि यह गुरुवारी प्रदोष दोषनिवारक, शत्रुसंहारक और इच्छापूर्ण करने वाला है; श्रद्धापूर्वक रखा गया यह व्रत साधक के जीवन में शांति, साहस और समृद्धि का स्थायी प्रतिष्ठान करता है।

अंतिम अपडेट: 23 Apr 2026 24 Sep 2026
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