भाद्रपद, शुक्ल द्वादशी

देवी भुवनेश्वरी प्राकट्योत्सव

23 Sep 2026, 10:30 AM Ujjain बुधवार
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भाद्रपद माह 2026 में देवी भुवनेश्वरी प्राकट्योत्सव कब है?

देवी भुवनेश्वरी प्राकट्योत्सव भुवनेश्वरी जयंती आदिशक्ति के उस दिव्य स्वरूप का स्मरण कराता है जिन्हें समस्त सृष्टि की अधिष्ठात्री और ‘राजराजेश्वरी’ के रूप में पूजा जाता है। तांत्रिक परंपराओं में उन्हें उस मूल शक्ति के रूप में माना गया है, जिससे सृष्टि की उत्पत्ति और उसका संचालन संभव होता है। इस अवसर पर साधक श्रद्धा के साथ स्नान-ध्यान कर देवी की उपासना करते हैं और उनके मंत्रों का जप करते हैं। ऐसी मान्यता है कि भुवनेश्वरी साधना मन को स्थिर करती है, भय को दूर करती है और साधक को आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ने की शक्ति देती है। शास्त्रीय दृष्टि से देवी को शिव की अनंत शक्ति का स्वरूप माना गया है, जहाँ शिव और शक्ति एक-दूसरे से अलग नहीं, बल्कि एक ही सत्य के दो पहलू हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में उनकी पूजा भले ही भिन्न रूपों में होती हो, लेकिन उनका मूल भाव एक ही रहता है, संपूर्ण जगत में व्याप्त दिव्य चेतना का अनुभव। यह उत्सव साधक को भीतर से मजबूत बनने, करुणा विकसित करने और जीवन को अधिक संतुलित व सजग दृष्टि से देखने की प्रेरणा देता है।

अंतिम अपडेट: 23 Apr 2026 23 Sep 2026
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