भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी पर मनाई जाने वाली अनन्त चतुर्दशी विष्णु‑आराधना और गणेशोत्सव‑समापन का संयुक्त पर्व है। इस दिन भक्त शेषशायी भगवान विष्णु, माता यमुना व अनन्त‑शेष का पूजन कर ‘अनन्त सूत्र’ धारण करते हैं। केसर‑रंजित लाल धागे में हल्दी‑कुमकुम और दूर्वा पिरोकर चौदह गाँठें बाँधी जाती हैं; प्रत्येक गाँठ चौदह लोकों की रक्षा‑शक्ति का प्रतीक है। पूजा के बाद पुरुष दाएँ, स्त्रियाँ बाएँ हाथ में यह सूत्र बाँधते हुए चौदह दिन तक सत्य, संयम और सेवा निभाने का संकल्प लेते हैं। विश्वास है कि इस सूत्र में स्वयं विष्णु प्रतिष्ठित रहते हैं; उनके प्रभाव से पाप घटते हैं, घर में समृद्धि बढ़ती और मन स्थिर होता है। इसी तिथि को “पुढच्या वर्षी लवकर या” के जयघोष के साथ गजानन का विसर्जन भी सम्पन्न होता है।