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श्री गणपती विसर्जन

25 सितंबर 2026 · शुक्रवार भाद्रपद, शुक्ल चतुर्दशी

भाद्रपद माह 2026 में श्री गणपती विसर्जन कब है?

संक्षिप्त उत्तर

श्री गणपती विसर्जन 2026 कब है?

श्री गणपती विसर्जन 2026 शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। श्री गणपती विसर्जन की तिथि भाद्रपद, शुक्ल चतुर्दशी है। श्री गणपती विसर्जन की पूजा का शुभ मुहूर्त 05:48 – 08:12 तक रहेगा।

दिनांक25 सितंबर 2026
तिथिभाद्रपद, शुक्ल चतुर्दशी
पूजा मुहूर्त05:48 – 08:12
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिभाद्रपद, शुक्ल चतुर्दशीभाद्रपद माह के व्रत-त्यौहार
मुख्य देवताभगवान गणेश
वार-देवतामाँ लक्ष्मी · माँ संतोषीशुक्रवार
नक्षत्रशतभिषाशूल
संक्षिप्त परिचय

श्री गणपती विसर्जन का महत्व और उत्सव

श्री गणपती विसर्जन भाद्रपद, शुक्ल चतुर्दशी तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि एवं रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)शुक्ल चतुर्दशी
नक्षत्रशतभिषा
योगशूल
करणगर
ऋतुशरददक्षिणायन
संवत्सरसिद्धार्थि
दिशा शूलपश्चिमजौ या दही खाकर

श्री गणपती विसर्जन के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 04:12 – 05:00 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 05:48 – 08:12 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:25 – 12:13 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 16:15 – 17:03 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 17:04 – 18:16 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 10:19 – 11:49 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 24 Sep 11:18 PM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 04:12–05:00
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 05:48–08:12
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:25 – 12:13
तिथि समाप्त 25 Sep 11:06 PM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 17:04–18:16

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

श्री गणपती विसर्जन — महत्व, कथा और परंपरा

गणपति बाप्पा का विसर्जन अनंत चतुर्दशी की शुक्ल चतुर्दशी पर उसी श्रद्धा से होता है, जिस सावधानी से स्थापना की गई थी। शास्त्र कहते हैं कि गणेश जल‑तत्त्व के अधिपति हैं; अतः दस दिनों तक घर‑आँगन में विघ्नहर्ता के आतिथ्य के बाद मूर्ति को पुनः जल‑कुक्षि में लौटाना ही पूर्ण विदाई है। आरती, अथर्वशीर्ष पाठ और ढोल‑ताशों की गूँज के बीच पहले गणेश के विविध स्वरूपों—एकदंत, महोदर, गजानन—का स्मरण कर मोदक, दूर्वा व पुष्प अर्पित किए जाते हैं। फिर भक्त “पुढच्या वर्षी लवकर या” की विनती करते हुए मूर्ति को धीरे‑से प्रवाहित करते हैं, मानो सारे सुख‑दु:ख बाप्पा के चरणों में सौंप रहे हों। इस मंगल वेला में विश्वास जाग उठता है कि विघ्नों का बोझ उतर गया और अगले बरस खुशियाँ दुगनी होकर लौटेंगी।

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

श्री गणपती विसर्जन की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिभाद्रपद, शुक्ल चतुर्दशी
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
आराध्य देवभगवान गणेश
माह पद्धतिपूर्णिमांत (उत्तर भारत)
अंतिम संशोधन23 Apr 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा चशास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2026 में श्री गणपती विसर्जन 25 सितंबर 2026 (शुक्रवार) को है।
श्री गणपती विसर्जन भाद्रपद, शुक्ल चतुर्दशी तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
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अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।