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चैत्र प्रदोष व्रत

4 अप्रैल 2027 · रविवार फाल्गुन, कृष्ण त्रयोदशी

चैत्र माह में प्रदोष व्रत कब है?

संक्षिप्त उत्तर

चैत्र प्रदोष व्रत 2027 कब है?

चैत्र प्रदोष व्रत 2027 रविवार, 4 अप्रैल 2027 को मनाई जाएगी। चैत्र प्रदोष व्रत की तिथि फाल्गुन, कृष्ण त्रयोदशी है। चैत्र प्रदोष व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त 05:47 – 08:16 तक रहेगा।

दिनांक4 अप्रैल 2027
तिथिफाल्गुन, कृष्ण त्रयोदशी
पूजा मुहूर्त05:47 – 08:16
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिफाल्गुन, कृष्ण त्रयोदशीचैत्र माह के व्रत-त्योहार
मुख्य देवताभगवान शिव
वार-देवतासूर्य देवरविवार
नक्षत्रशतभिषाशुभ
संक्षिप्त परिचय

चैत्र प्रदोष व्रत का महत्व और उत्सव

चैत्र प्रदोष व्रत फाल्गुन, कृष्ण त्रयोदशी तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है। इस दिन भगवान शिव की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि एवं रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)कृष्ण त्रयोदशी
नक्षत्रशतभिषा
योगशुभ
करणगर
ऋतुवसन्तउत्तरायण
संवत्सररौद्र
दिशा शूलपश्चिमघी या दलिया खाकर

चैत्र प्रदोष व्रत के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 04:11 – 04:59 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 05:47 – 08:16 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:36 – 12:26 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 16:36 – 17:26 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 17:28 – 18:40 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 16:42 – 18:15 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 04 Apr 04:26 AM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 04:11–04:59
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 05:47–08:16
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:36 – 12:26
तिथि समाप्त 05 Apr 05:23 AM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 17:28–18:40

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

चैत्र प्रदोष व्रत — महत्व, कथा और परंपरा

चैत्र मास का प्रदोष व्रत शुक्ल या कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। चैत्र का महीना वसंत ऋतु का प्रतीक है, जब प्रकृति में नवीनता के साथ-साथ आध्यात्मिक जागरूकता भी बढ़ती है। इसी पावन वातावरण में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व माना गया है। प्रदोष काल सूर्यास्त के तुरंत बाद रात्रि के प्रथम प्रहर को कहा जाता है। इस समय भगवान शिव और माता पार्वती की श्रद्धापूर्वक आराधना की जाती है। भविष्य पुराण के अनुसार त्रयोदशी की संध्या में यदि कोई भक्त भेंट सहित शिव प्रतिमा के दर्शन करता है, तो उस पर भगवान शिव की कृपा बनी रहती है। यदि प्रदोष व्रत गुरुवार को पड़े, तो उसे गुरु प्रदोष कहा जाता है। इस दिन शिव-पार्वती की पूजा के बाद भोग अर्पित कर शिव चालीसा का पाठ किया जाता है। यह व्रत शांति, स्थिरता और आध्यात्मिक बल प्रदान करने वाला माना जाता है।

आवर्ती व्रत

अन्य प्रदोष व्रत तिथियाँ

सभी प्रदोष व्रत तिथियाँ देखें →
नामतिथिवारपक्ष/तिथिदिन शेष
आश्विन गुरु प्रदोष व्रत 8 अक्टूबर 2026 गुरुवार भाद्रपद, कृष्ण त्रयोदशी 12 दिन शेष देखें
आश्विन शुक्र प्रदोष व्रत 23 अक्टूबर 2026 शुक्रवार आश्विन, शुक्ल द्वादशी 27 दिन शेष देखें
मार्गशीर्ष सोम प्रदोष व्रत 21 दिसंबर 2026 सोमवार मार्गशीर्ष, शुक्ल द्वादशी 86 दिन शेष देखें
पौष भौम प्रदोष व्रत 5 जनवरी 2027 मंगलवार मार्गशीर्ष, कृष्ण त्रयोदशी 101 दिन शेष देखें
माघ गुरु प्रदोष व्रत 18 फरवरी 2027 गुरुवार माघ, शुक्ल द्वादशी 145 दिन शेष देखें
फाल्गुन प्रदोष व्रत 5 मार्च 2027 शुक्रवार माघ, कृष्ण द्वादशी 160 दिन शेष देखें

पूरा वार्षिक कैलेंडर, व्रत विधि और पारण नियम — प्रदोष व्रत हब पेज पर देखें।

मंत्र संग्रह

चैत्र प्रदोष व्रत से संबंधित मंत्र

सभी मंत्र →

शिव मूल मंत्र

ॐ नमः शिवाय

“ॐ नमः शिवाय” का अर्थ है—मैं भगवान शिव को नमन करता हूँ। इसमें “ॐ” परम चेतना, “नमः” विनम्र समर्पण और “शिवाय” कल्याणकारी भ…

पूरा मंत्र पढ़ें →
विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

चैत्र प्रदोष व्रत की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिफाल्गुन, कृष्ण त्रयोदशी
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
आराध्य देवभगवान शिव
माह पद्धतिपूर्णिमांत (उत्तर भारत)
अमांत माह (दक्षिण/महा./गुज.)फाल्गुन
अंतिम संशोधन05 Sep 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। यह तिथि पूर्णिमांत पंचांग (उत्तर भारत) के अनुसार है, जिसमें यह चैत्र माह के कृष्ण पक्ष में आती है। दक्षिण भारत, महाराष्ट्र और गुजरात में प्रचलित अमांत पंचांग में यही दिन फाल्गुन माह में गिना जाता है — तिथि और पर्व वही रहते हैं, केवल माह का नाम भिन्न होता है। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा चशास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2027 में चैत्र प्रदोष व्रत 4 अप्रैल 2027 (रविवार) को है।
चैत्र प्रदोष व्रत फाल्गुन, कृष्ण त्रयोदशी तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
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अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।