चैत्र, कृष्ण त्रयोदशी

चैत्र प्रदोष व्रत

04 Apr 2027, 09:56 AM Ujjain रविवार
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चैत्र माह में प्रदोष व्रत कब है?

चैत्र मास का प्रदोष व्रत शुक्ल या कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। चैत्र का महीना वसंत ऋतु का प्रतीक है, जब प्रकृति में नवीनता के साथ-साथ आध्यात्मिक जागरूकता भी बढ़ती है। इसी पावन वातावरण में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व माना गया है। प्रदोष काल सूर्यास्त के तुरंत बाद रात्रि के प्रथम प्रहर को कहा जाता है। इस समय भगवान शिव और माता पार्वती की श्रद्धापूर्वक आराधना की जाती है। भविष्य पुराण के अनुसार त्रयोदशी की संध्या में यदि कोई भक्त भेंट सहित शिव प्रतिमा के दर्शन करता है, तो उस पर भगवान शिव की कृपा बनी रहती है। यदि प्रदोष व्रत गुरुवार को पड़े, तो उसे गुरु प्रदोष कहा जाता है। इस दिन शिव-पार्वती की पूजा के बाद भोग अर्पित कर शिव चालीसा का पाठ किया जाता है। यह व्रत शांति, स्थिरता और आध्यात्मिक बल प्रदान करने वाला माना जाता है।

अंतिम अपडेट: 18 Jun 2026 04 Apr 2027
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