द्वितीय श्रावण सोमवार वर्षा-ऋतु की पावन छाया में भगवान शिव की विशेष उपासना का दिवस है। इस दिन महाकालेश्वर का पूजन कर रुद्राक्ष-माला से “ॐ महाशिवाय वरदाय हीं ऐं काम्य सिद्धि रुद्राय नमः” मंत्र का कम-से-कम 11 माला जाप करना श्रेयस्कर माना गया है। शिव-आराधना के साथ माता पार्वती, सूर्यदेव और पुत्र कार्तिकेय की पूजा भी अनिवार्य मानी जाती है, जिससे परिवार में सौहार्द, शक्ति और तेज का संचार होता है। उपवास रखकर गंगाजल, चंदन, अक्षत, बेलपत्र, धतूरा या आक-पुष्प से शिवलिंग का अभिषेक करना शास्त्रसम्मत विधान है। श्रावण के प्रत्येक सोमवार में यह साधना भक्त की कामनाओं को सिद्ध करने तथा तन-मन को पवित्र करने का प्राचीन, परखा हुआ मार्ग बताया गया है।