वैसाख अमावस्या का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना गया है। शास्त्रों के अनुसार इसी वैसाख मास से त्रेता युग का आरंभ हुआ था, इसलिए यह अमावस्या आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत पुण्यदायी मानी जाती है। वैसाख का महीना तप, संयम और स्नान-दान के लिए श्रेष्ठ माना गया है, और इसी वातावरण में वैसाख अमावस्या आत्मशुद्धि का अवसर प्रदान करती है। मान्यता है कि इस दिन प्रदोष काल में दीपदान करने से अकाल मृत्यु के भय से रक्षा होती है। वैसाख अमावस्या पर गंगा, यमुना जैसी पवित्र नदियों में स्नान और पूजन का विशेष महत्व है। स्नान के समय पवित्र नदियों का स्मरण करते हुए मंत्र जप करने की परंपरा है। इस दिन सूर्यदेव को अर्घ्य देकर बहते जल में तिल प्रवाहित किए जाते हैं और पीपल वृक्ष को जल अर्पित किया जाता है। दक्षिण भारत में इसी तिथि को शनि जयंती भी मनाई जाती है, इसलिए शनिदेव की पूजा, दीपदान और शनि चालीसा पाठ करना शुभ माना जाता है।