भगवान परशुराम जन्मोत्सव वैसाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को श्रद्धापूर्वक मनाया जाता है। इसी दिन भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम का प्राकट्य हुआ था। वैसाख मास तप, संयम और धर्मस्थापना से जुड़ा माना जाता है, इसलिए इस तिथि का विशेष महत्व है। मान्यता है कि भगवान परशुराम का जन्म प्रदोष काल में हुआ था, इसी कारण तृतीया के प्रदोष समय में उनका जन्मोत्सव मनाया जाता है। वे भगवान शिव के परम भक्त और सात चिरंजीवियों में से एक हैं। शास्त्रों के अनुसार परशुराम जी ने अधर्म के नाश और न्याय की स्थापना के लिए कठोर तप और पराक्रम का मार्ग अपनाया। यह पर्व शक्ति, अनुशासन और धर्मनिष्ठा का प्रतीक माना जाता है।