माघ माह हिंदू पंचांग का ग्यारहवाँ अध्याय है; कड़ाके की सर्दी के बीच शुरू होकर बसंत की आहट तक पहुँचता है। इसी पवित्र महीने की अमावस्या ‘मौनी अमावस्या’ कहलाती है। शास्त्रों में कहा गया है कि इस दिन त्रिवेणी संगम पर देवता स्वयं विराजते हैं, इसलिए प्रयागराज के माघ मेले में शाही स्नान का यही मुहूर्त होता है। प्रातःकाल गंगा-यमुना के शीतल जल में डुबकी लगाकर शरीर ही नहीं, मन भी शुद्ध होता है। स्नान के बाद विष्णु और महादेव का षोडशोपचार पूजन करें, तुलसी-दल व बिल्वपत्र अर्पित करें, फिर मौन धारण कर “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” तथा “ॐ नमः शिवाय” का मानसिक जप करें। मान्यता है कि इस एक दिन की तपस्या कार्तिक स्नान के समान फल देती है और शांति, सौभाग्य व दीर्घायु का आशीर्वाद दिलाती है।