कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी
कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी 2027 कब है?
कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी 2027 रविवार, 23 मई 2027 को मनाई जाएगी। कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी की तिथि वैशाख, कृष्ण तृतीया है। कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी की पूजा का शुभ मुहूर्त 05:10 – 07:52 तक रहेगा।
पर्व सारांश
कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी का महत्व और उत्सव
कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी वैशाख, कृष्ण तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है। इस दिन Lord Ganesha की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि एवं रक्षा की प्रार्थना की जाती है।
त्योहार का पंचांग और शुभ समय
कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय
| मुहूर्त / योग | समय | उपयोग | स्थिति |
|---|---|---|---|
| ब्रह्म मुहूर्त | 03:34 – 04:22 | स्नान, जप, संकल्प | शुभ |
| प्रातः पूजन | 05:10 – 07:52 | पूजा और संकल्प | श्रेष्ठ |
| अभिजीत मुहूर्त | 11:27 – 12:21 | सामान्य शुभ कार्य | शुभ |
| विजय मुहूर्त | 16:52 – 17:46 | कार्य-सिद्धि, संकल्प | शुभ |
| सन्ध्या पूजन | 17:52 – 19:04 | दीप, आरती, कथा | शुभ |
| राहु काल (वर्ज्य) | 16:58 – 18:39 | शुभ कार्य में टालें | सावधानी |
समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।
अन्य संकष्टी चतुर्थी तिथियाँ
पूरा वार्षिक कैलेंडर, व्रत विधि और पारण नियम — संकष्टी चतुर्थी हब पेज पर देखें।
कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी के बारे में रोचक तथ्य
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कृष्णपिंगल संकष्टी चतुर्थी की तिथि कैसे निर्धारित हुई?
तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। यह तिथि पूर्णिमांत पंचांग (उत्तर भारत) के अनुसार है, जिसमें यह ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष में आती है। दक्षिण भारत, महाराष्ट्र और गुजरात में प्रचलित अमांत पंचांग में यही दिन वैशाख माह में गिना जाता है — तिथि और पर्व वही रहते हैं, केवल माह का नाम भिन्न होता है। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अस्वीकरण
इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।