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भालचन्द्र संकष्टी चतुर्थी

25 मार्च 2027 · गुरुवार फाल्गुन, कृष्ण तृतीया

फाल्गुन माह 2027 में भालचन्द्र संकष्टी चतुर्थी कब है?

संक्षिप्त उत्तर

भालचन्द्र संकष्टी चतुर्थी 2027 कब है?

भालचन्द्र संकष्टी चतुर्थी 2027 गुरुवार, 25 मार्च 2027 को मनाई जाएगी। भालचन्द्र संकष्टी चतुर्थी की तिथि फाल्गुन, कृष्ण तृतीया है। भालचन्द्र संकष्टी चतुर्थी की पूजा का शुभ मुहूर्त 05:57 – 08:23 तक रहेगा।

दिनांक25 मार्च 2027
तिथिफाल्गुन, कृष्ण तृतीया
पूजा मुहूर्त05:57 – 08:23
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिफाल्गुन, कृष्ण तृतीयाफाल्गुन माह के व्रत-त्यौहार
मुख्य देवताभगवान कार्तिकेय
वार-देवताभगवान विष्णुगुरुवार
नक्षत्रस्वातिव्याघात
संक्षिप्त परिचय

भालचन्द्र संकष्टी चतुर्थी का महत्व और उत्सव

भालचन्द्र संकष्टी चतुर्थी फाल्गुन, कृष्ण तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है। इस दिन भगवान कार्तिकेय की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि एवं रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)कृष्ण तृतीया
नक्षत्रस्वाति
योगव्याघात
करणविष्टि
ऋतुवसन्तउत्तरायण
संवत्सररौद्र
दिशा शूलदक्षिणदही खाकर

भालचन्द्र संकष्टी चतुर्थी के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 04:21 – 05:09 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 05:57 – 08:23 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:39 – 12:28 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 16:33 – 17:22 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 17:23 – 18:35 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 13:35 – 15:07 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 25 Mar 12:37 PM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 04:21–05:09
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 05:57–08:23
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:39 – 12:28
तिथि समाप्त 26 Mar 12:43 PM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 17:23–18:35

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

भालचन्द्र संकष्टी चतुर्थी — महत्व, कथा और परंपरा

भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली संकष्टी चतुर्थी को कहा जाता है। फाल्गुन का महीना वसंत ऋतु का प्रतीक है, जब प्रकृति में उल्लास, नवीनता और सौम्यता का संचार होता है। इसी पवित्र और शांत वातावरण में भगवान गणेश के भालचंद्र स्वरूप की उपासना विशेष फलदायी मानी जाती है। संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा की जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं, नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है और घर में सुख-शांति का वास बना रहता है। हिंदू पंचांग के अनुसार पूरे वर्ष में तेरह संकष्टी चतुर्थी व्रत होते हैं और प्रत्येक का अपना अलग महत्व और कथा होती है। भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश को लड्डू, शकरकंद और फलों का भोग अर्पित किया जाता है। भक्त पूरे दिन व्रत रखते हैं और संध्या समय चंद्रदर्शन के बाद पूजा संपन्न करते हैं। श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया यह व्रत विशेष रूप से विघ्नों को दूर करने वाला और मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला माना गया है।

 
 
आवर्ती व्रत

अन्य संकष्टी चतुर्थी तिथियाँ

सभी संकष्टी चतुर्थी तिथियाँ देखें →
नामतिथिवारपक्ष/तिथिदिन शेष
विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी 29 सितंबर 2026 मंगलवार भाद्रपद, कृष्ण तृतीया 12 दिन शेष देखें
वक्रतुण्ड संकष्टी चतुर्थी 29 अक्टूबर 2026 गुरुवार आश्विन, कृष्ण चतुर्थी 41 दिन शेष देखें
गणाधिप संकष्टी चतुर्थी 27 नवंबर 2026 शुक्रवार कार्तिक, कृष्ण तृतीया 70 दिन शेष देखें
अखुरथ संकष्टी चतुर्थी 27 दिसंबर 2026 रविवार मार्गशीर्ष, कृष्ण चतुर्थी 100 दिन शेष देखें
लम्बोदर संकष्टी चतुर्थी 25 जनवरी 2027 सोमवार पौष, कृष्ण तृतीया 129 दिन शेष देखें
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 24 फरवरी 2027 बुधवार माघ, कृष्ण चतुर्थी 159 दिन शेष देखें

पूरा वार्षिक कैलेंडर, व्रत विधि और पारण नियम — संकष्टी चतुर्थी हब पेज पर देखें।

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

भालचन्द्र संकष्टी चतुर्थी की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिफाल्गुन, कृष्ण तृतीया
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
आराध्य देवभगवान कार्तिकेय
माह पद्धतिपूर्णिमांत (उत्तर भारत)
अमांत माह (दक्षिण/महा./गुज.)फाल्गुन
अंतिम संशोधन05 Sep 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। यह तिथि पूर्णिमांत पंचांग (उत्तर भारत) के अनुसार है, जिसमें यह चैत्र माह के कृष्ण पक्ष में आती है। दक्षिण भारत, महाराष्ट्र और गुजरात में प्रचलित अमांत पंचांग में यही दिन फाल्गुन माह में गिना जाता है — तिथि और पर्व वही रहते हैं, केवल माह का नाम भिन्न होता है। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा शास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2027 में भालचन्द्र संकष्टी चतुर्थी 25 मार्च 2027 (गुरुवार) को है।
भालचन्द्र संकष्टी चतुर्थी फाल्गुन, कृष्ण तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
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अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।