चैत्र विनायक चतुर्थी चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाती है। चैत्र महीना वसंत ऋतु का समय होता है, जब प्रकृति में नई ऊर्जा और ताजगी का संचार होता है। इसी शुभ वातावरण में भगवान श्रीगणेश की उपासना विशेष फलदायी मानी जाती है। विनायक चतुर्थी पर मध्याह्न काल में पूजा करने का विधान है। इस दिन श्रीगणेश की पूजा के साथ चंद्रमा को अर्घ्य देना भी शुभ माना गया है। पूजन में भगवान गणेश को सिंदूर अर्पित किया जाता है और 21 लड्डू या मोदक का भोग लगाया जाता है। श्रद्धा और शुद्ध मन से की गई आराधना से मानसिक शांति प्राप्त होती है और घर-परिवार में सुख-समृद्धि बढ़ती है। परंपरा के अनुसार इस दिन दो बार पूजा की जाती है। मान्यता है कि विनायक चतुर्थी का व्रत करने से कार्यों में सफलता मिलती है और बाधाएँ दूर होती हैं।