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श्री लक्ष्मी पञ्चमी

11 अप्रैल 2027 · रविवार फाल्गुन, शुक्ल पंचमी

चैत्र माह 2027 में श्री लक्ष्मी पञ्चमी कब है ?

संक्षिप्त उत्तर

श्री लक्ष्मी पञ्चमी 2027 कब है?

श्री लक्ष्मी पञ्चमी 2027 रविवार, 11 अप्रैल 2027 को मनाई जाएगी। श्री लक्ष्मी पञ्चमी की तिथि फाल्गुन, शुक्ल पंचमी है। श्री लक्ष्मी पञ्चमी की पूजा का शुभ मुहूर्त 05:40 – 08:11 तक रहेगा।

दिनांक11 अप्रैल 2027
तिथिफाल्गुन, शुक्ल पंचमी
पूजा मुहूर्त05:40 – 08:11
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिफाल्गुन, शुक्ल पंचमीचैत्र माह के व्रत-त्योहार
मुख्य देवतामाँ लक्ष्मी
वार-देवतासूर्य देवरविवार
नक्षत्ररोहिणीसौभाग्य
संक्षिप्त परिचय

श्री लक्ष्मी पञ्चमी का महत्व और उत्सव

श्री लक्ष्मी पञ्चमी फाल्गुन, शुक्ल पंचमी तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है। इस दिन माँ लक्ष्मी की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि एवं रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)शुक्ल पंचमी
नक्षत्ररोहिणी
योगसौभाग्य
करणबव
ऋतुवसन्तउत्तरायण
संवत्सररौद्र
दिशा शूलपश्चिमघी या दलिया खाकर

श्री लक्ष्मी पञ्चमी के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 04:04 – 04:52 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 05:40 – 08:11 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:33 – 12:24 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 16:37 – 17:28 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 17:31 – 18:43 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 16:43 – 18:18 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 10 Apr 11:39 PM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 04:04–04:52
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 05:40–08:11
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:33 – 12:24
तिथि समाप्त 11 Apr 09:39 PM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 17:31–18:43

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

श्री लक्ष्मी पञ्चमी — महत्व, कथा और परंपरा

लक्ष्मी पंचमी का पर्व चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। चैत्र महीना वसंत ऋतु का प्रतीक है, जब प्रकृति के साथ-साथ जीवन में भी नवीनता और शुभ आरंभ का भाव जागृत होता है। इसी पावन वातावरण में माँ लक्ष्मी की आराधना विशेष फलदायी मानी गई है। इस दिन उपवास रखकर श्रीसूक्त का पाठ करते हुए माँ लक्ष्मी की पूजा की जाती है। इसे लक्ष्मी पंचमी या श्री पंचमी भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि चैत्र शुक्ल पंचमी को की गई श्री आराधना मनोकामनाओं की पूर्ति करती है। यदि जन्मपत्रिका में कालसर्प दोष हो, तो इस दिन माँ मंशा देवी का पूजन, कच्चे गौ दुग्ध का नैवेद्य और घी का दीपक अर्पित करने का विधान बताया गया है। यह तिथि सात कल्पादि तिथियों में से एक मानी जाती है, इसलिए इसे अत्यंत शुभ और सौभाग्यवर्धक कहा गया है।

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

श्री लक्ष्मी पञ्चमी की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिफाल्गुन, शुक्ल पंचमी
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
आराध्य देवमाँ लक्ष्मी
माह पद्धतिपूर्णिमांत (उत्तर भारत)
अंतिम संशोधन05 Sep 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा चशास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2027 में श्री लक्ष्मी पञ्चमी 11 अप्रैल 2027 (रविवार) को है।
श्री लक्ष्मी पञ्चमी फाल्गुन, शुक्ल पंचमी तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
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अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।