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आश्विन विनायक चतुर्थी

14 अक्टूबर 2026 · बुधवार भाद्रपद, शुक्ल चतुर्थी

आश्विन माह 2026 में विनायक चतुर्थी कब है?

संक्षिप्त उत्तर

आश्विन विनायक चतुर्थी 2026 कब है?

आश्विन विनायक चतुर्थी 2026 बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को मनाई जाएगी। आश्विन विनायक चतुर्थी की तिथि भाद्रपद, शुक्ल चतुर्थी है। आश्विन विनायक चतुर्थी की पूजा का शुभ मुहूर्त 05:56 – 08:15 तक रहेगा।

दिनांक14 अक्टूबर 2026
तिथिभाद्रपद, शुक्ल चतुर्थी
पूजा मुहूर्त05:56 – 08:15
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिभाद्रपद, शुक्ल चतुर्थीआश्विन माह के व्रत-त्यौहार
मुख्य देवताभगवान गणेश
वार-देवताभगवान गणेशबुधवार
नक्षत्रअनुराधाआयुष्मान
संक्षिप्त परिचय

आश्विन विनायक चतुर्थी का महत्व और उत्सव

आश्विन विनायक चतुर्थी भाद्रपद, शुक्ल चतुर्थी तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि एवं रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)शुक्ल चतुर्थी
नक्षत्रअनुराधा
योगआयुष्मान
करणवणिज
ऋतुशरददक्षिणायन
संवत्सरसिद्धार्थि
दिशा शूलउत्तरधनिया या तिल खाकर

आश्विन विनायक चतुर्थी के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 04:20 – 05:08 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 05:56 – 08:15 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:20 – 12:07 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 15:59 – 16:45 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 16:44 – 17:56 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 11:44 – 13:11 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 13 Oct 11:27 PM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 04:20–05:08
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 05:56–08:15
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:20 – 12:07
तिथि समाप्त 15 Oct 01:13 AM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 16:44–17:56

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

आश्विन विनायक चतुर्थी — महत्व, कथा और परंपरा

आश्विन शुक्ल चतुर्थी पर रखा जाने वाला विनायक चतुर्थी व्रत मासिक गणेश‑आराधना का श्रेष्ठ अवसर है। गणेशजी के “विनायक” नाम से अभिहित यह व्रत दो चरणों में सम्पन्न होता है—प्रथम पूजन मध्य‑पूर्वाह्न में, द्वितीय मध्याह्न काल में। साधक शुद्ध जल से स्नान कर स्वच्छ आसन ग्रहण करता है, फिर श्रीगणेश को फल, पुष्प, धूप‑दीप, कपूर, अक्षत और दूर्वा समर्पित कर “विघ्नराजं भजे” का संकीर्तन करता है। गणपति स्तोत्र अथवा गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ साधक के अंतर्मन को स्थिरता देता है और नूतन साहस जगाता है। विश्वास है कि इस पूजन से आरम्भ किया गया कार्य अवरोध‑रहित पूर्ण होता है; अतः विघ्नविनाशक श्रीगणेश की कृपा से संकट दूर होते हैं, मनोरथ सिद्ध होते हैं और परिवार में मंगलमय वातावरण बना रहता है।

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

आश्विन विनायक चतुर्थी की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिभाद्रपद, शुक्ल चतुर्थी
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
आराध्य देवभगवान गणेश
माह पद्धतिपूर्णिमांत (उत्तर भारत)
अंतिम संशोधन05 Sep 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा चशास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2026 में आश्विन विनायक चतुर्थी 14 अक्टूबर 2026 (बुधवार) को है।
आश्विन विनायक चतुर्थी भाद्रपद, शुक्ल चतुर्थी तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
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अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।