चैत्र स्कन्द षष्ठी का पर्व चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। चैत्र का महीना वसंत ऋतु का समय होता है, जब प्रकृति में नवीनता के साथ शक्ति और उत्साह का संचार दिखाई देता है। इसी पावन काल में स्कन्द षष्ठी बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक मानी जाती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार इसी तिथि को कुमार कार्तिकेय ने तारकासुर नामक राक्षस का वध कर देवताओं को भयमुक्त किया था। भगवान कार्तिकेय का वाहन मोर है, इसलिए दक्षिण भारत में उन्हें मुरुगन के नाम से विशेष श्रद्धा के साथ पूजा जाता है। इस दिन विधिपूर्वक व्रत रखने से संतान सुख की प्राप्ति तथा रोग, दुख और दरिद्रता से मुक्ति का विश्वास किया जाता है। परंपरा अनुसार अखंड दीपक प्रज्ज्वलित कर भगवान मुरुगन की आराधना की जाती है और उनके मंत्र का यथाशक्ति जप किया जाता है। यह पर्व साहस, संरक्षण और आत्मबल का प्रतीक माना जाता है।