श्री झूलेलाल जयंती, जिसे चेटी चंड के नाम से जाना जाता है, सिंधी समुदाय का प्रमुख और अत्यंत श्रद्धापूर्ण पर्व है। यह उत्सव चैत्र मास में मनाया जाता है, जो वसंत ऋतु और नवआरंभ का प्रतीक माना जाता है। चैत्र के साथ ही सिंधी नववर्ष का शुभारंभ होता है, इसलिए चेटी चंड को सिंधी समाज के नवसंवत्सर के रूप में भी देखा जाता है। श्री झूलेलाल को लाल साई, उदेरो लाल, वरुण देव, दरिया लाल और जिंदा पीर जैसे अनेक नामों से जाना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार वे भगवान वरुण देव के अवतार माने जाते हैं। इस दिन सिंधी समाज जलदेव और श्री झूलेलाल की पूजा-अर्चना करता है। घरों और मंदिरों में भजन, कीर्तन और शोभायात्राएँ निकलती हैं। प्रसाद के रूप में उबले काले चने और मीठा भात वितरित किया जाता है। यह पर्व आस्था, एकता और सांस्कृतिक पहचान का सुंदर प्रतीक है।