आश्विन शुक्ल प्रतिपदा को मनाई जाने वाली महाराजा अग्रसेन जयंती महाराजा अग्रसेन जयंती वैश्य समाज के आदर्श शासक के तेजस्वी चरित्र का स्मरण कराती है। सूर्यवंशी राजा वल्लभ के पुत्र महाराजा अग्रसेन का जन्म द्वापर युग के अंतिम चरण में माना जाता है, और वे भगवान राम की वंश परंपरा से जुड़े माने जाते हैं। उन्होंने अग्रोहा (अग्रोदक) नगरी को समृद्धि, न्याय और समानता का आदर्श केंद्र बनाया। लोक-मान्यता के अनुसार, महाराजा अग्रसेन ने समाज में सहयोग और समता को बढ़ावा देने के लिए “एक ईंट, एक मुद्रा” की नीति अपनाई, जिसके तहत नए बसने वाले व्यक्ति को प्रत्येक परिवार की ओर से एक ईंट और एक मुद्रा देकर उसे आत्मनिर्भर बनने में सहायता दी जाती थी। यह नीति उनके दूरदर्शी और मानवीय शासन का प्रतीक मानी जाती है। आज अग्रवाल, अग्रहरी सहित संपूर्ण व्यापारी समुदाय महाराजा अग्रसेन को दानशीलता, न्याय और सामाजिक समरसता के प्रतीक के रूप में श्रद्धा से स्मरण करता है, और उनके सिद्धांत आज भी व्यापार और समाज दोनों को दिशा देने वाले माने जाते हैं।