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आश्विन चन्द्र दर्शन

12 अक्टूबर 2026 · सोमवार भाद्रपद, शुक्ल द्वितीया

आश्विन माह 2026 में चन्द्र दर्शन कब है?

संक्षिप्त उत्तर

आश्विन चन्द्र दर्शन 2026 कब है?

आश्विन चन्द्र दर्शन 2026 सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को मनाई जाएगी। आश्विन चन्द्र दर्शन की तिथि भाद्रपद, शुक्ल द्वितीया है। आश्विन चन्द्र दर्शन की पूजा का शुभ मुहूर्त 05:55 – 08:14 तक रहेगा।

दिनांक12 अक्टूबर 2026
तिथिभाद्रपद, शुक्ल द्वितीया
पूजा मुहूर्त05:55 – 08:14
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिभाद्रपद, शुक्ल द्वितीयाआश्विन माह के व्रत-त्यौहार
मुख्य देवताभगवान चंद्रदेव
वार-देवताशिव जीसोमवार
नक्षत्रस्वातिविष्कम्भ
संक्षिप्त परिचय

आश्विन चन्द्र दर्शन का महत्व और उत्सव

आश्विन चन्द्र दर्शन भाद्रपद, शुक्ल द्वितीया तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है। इस दिन भगवान चंद्रदेव की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि एवं रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)शुक्ल द्वितीया
नक्षत्रस्वाति
योगविष्कम्भ
करणबालव
ऋतुशरददक्षिणायन
संवत्सरसिद्धार्थि
दिशा शूलपूर्वदर्पण देखकर या दूध पीकर

आश्विन चन्द्र दर्शन के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 04:19 – 05:07 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 05:55 – 08:14 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:21 – 12:07 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 16:00 – 16:47 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 16:46 – 17:58 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 07:22 – 08:49 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 12 Oct 05:55 PM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 04:19–05:07
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 05:55–08:14
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:21 – 12:07
तिथि समाप्त 12 Oct 06:36 PM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 16:46–17:58

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

आश्विन चन्द्र दर्शन — महत्व, कथा और परंपरा

आश्विन अमावस्या के बाद जब आकाश में प्रथम बार चन्द्रमा की क्षीण रेखा झलकती है, उसी क्षण को आश्विन चन्द्रदर्शन कहते हैं। वेदपुराण चन्द्रदेव को सोम, सुधाकर और सुधांशु नामों से पुकारते हैं तथा उन्हें ज्ञान, मन और रस का अधिपति मानते हैं। परम्परा है कि इस नवचन्द्र के दर्शन पर अर्घ्य अर्पित कर खीर का नैवेद्य समर्पित किया जाए और मंत्र जप किया जाए—“ॐ क्षीरपुत्राय विद्महे अमृततत्त्वाय धीमहि, तन्नो चन्द्रः प्रचोदयात्।” माना जाता है कि ऐसा करने से चन्द्रमा की शीतल ऊर्जा साधक की बुद्धि, भावनाओं और सौभाग्य को प्रबल करती है। करवाचौथ अथवा त्रयोदशी जैसे व्रतों में चन्द्रोदय की प्रतीक्षा का कारण भी यही मान्यता है: नवोदित चन्द्रदेव की एक झलक मन को संतुलित करती है, पवित्र अभिलाषाएँ पुष्पित करती है और परिवार में शान्तिसमृद्धि का संचार करती है।

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

आश्विन चन्द्र दर्शन की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिभाद्रपद, शुक्ल द्वितीया
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
आराध्य देवभगवान चंद्रदेव
माह पद्धतिपूर्णिमांत (उत्तर भारत)
अंतिम संशोधन05 Sep 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा शास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2026 में आश्विन चन्द्र दर्शन 12 अक्टूबर 2026 (सोमवार) को है।
आश्विन चन्द्र दर्शन भाद्रपद, शुक्ल द्वितीया तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
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अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।