हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक माह शुक्ल पक्ष की चतुर्थी विनायक चतुर्थी कहलाती है। माघ में यह तिथि माघी गणेश जन्मोत्सव, तिलकुंड या वरद चतुर्थी के नाम से प्रसिद्ध है। मान्यता है कि इसी दिन श्रीगणेश प्रकट हुए; अतः भक्त उपवास रख-कर सिद्धिविनायक का अभिषेक करते हैं। शास्त्रों में वर्णित है कि माघ शुक्ल चतुर्थी की पूजा विघ्नों का नाश, धन-वृद्धि और वरदातृत्व का आशीष देती है। अग्निपुराण तिलकुंड व्रत को भाग्य तथा मोक्ष प्रदान करने वाला बताता है। इस अवसर पर पीले वस्त्रों से सजे गणपति को तिल-गुड़ के लड्डू, दूर्वा, लाल पुष्प व अक्षत अर्पित करना अत्यंत फलदायी माना गया है। संध्या-बेला में दीपदान कर “ॐ गं गणपतये नमः” का जप साधक के जीवन में मंगल, यश और प्रगति की ऊर्जा भरता है।