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श्री कालभैरव प्राकट्योत्सव

1 दिसंबर 2026 · मंगलवार कार्तिक, कृष्ण अष्टमी

मार्गशीर्ष माह 2026 में श्री कालभैरव प्राकट्योत्सव कब है?

संक्षिप्त उत्तर

श्री कालभैरव प्राकट्योत्सव 2026 कब है?

श्री कालभैरव प्राकट्योत्सव 2026 मंगलवार, 1 दिसंबर 2026 को मनाई जाएगी। श्री कालभैरव प्राकट्योत्सव की तिथि कार्तिक, कृष्ण अष्टमी है। श्री कालभैरव प्राकट्योत्सव की पूजा का शुभ मुहूर्त 06:27 – 08:35 तक रहेगा।

दिनांक1 दिसंबर 2026
तिथिकार्तिक, कृष्ण अष्टमी
पूजा मुहूर्त06:27 – 08:35
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिकार्तिक, कृष्ण अष्टमीमार्गशीर्ष - अगहन माह के व्रत-त्यौहार
मुख्य देवताभगवान कालभैरव
वार-देवताहनुमान जीमंगलवार
नक्षत्रमघावैधृति
संक्षिप्त परिचय

श्री कालभैरव प्राकट्योत्सव का महत्व और उत्सव

श्री कालभैरव प्राकट्योत्सव कार्तिक, कृष्ण अष्टमी तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है। इस दिन भगवान कालभैरव की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि एवं रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)कृष्ण अष्टमी
नक्षत्रमघा
योगवैधृति
करणबालव
ऋतुहेमन्तदक्षिणायन
संवत्सरसिद्धार्थि
दिशा शूलउत्तरगुड़ खाकर

श्री कालभैरव प्राकट्योत्सव के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 04:51 – 05:39 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 06:27 – 08:35 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:25 – 12:08 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 15:41 – 16:24 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 16:19 – 17:31 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 14:27 – 15:47 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 01 Dec 12:11 AM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 04:51–05:39
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 06:27–08:35
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:25 – 12:08
तिथि समाप्त 01 Dec 11:13 PM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 16:19–17:31

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

श्री कालभैरव प्राकट्योत्सव — महत्व, कथा और परंपरा

मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाया जाने वाला ‘श्री कालभैरव प्राकट्योत्सव’ शीत ऋतु की शुरुआत के साथ आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर माना जाता है। पुराणों में वर्णित है कि इसी तिथि पर कालभैरव प्रकट हुए और ‘ॐ कालभैरवाय नमः’ जप मात्र से रोग-विघ्न शांत होते हैं। रात्रिशील पूजन में काले तिल-उड़द, नीले पुष्पमाला, अक्षत, चंदन, काला वस्त्र, धतूरा तथा पाँच नींबू अर्पित करना शुभ माना गया है; इससे शत्रु-बाधाएँ निवृत्त होती हैं और परिवार में सुख-शांति, समृद्धि व दृढ़ स्वास्थ्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। मार्गशीर्ष की ठंडी, स्वच्छ हवाओं में की गई भैरव-साधना वैसे ही है जैसे अँधेरी रात में दीप-प्रकाश—उम्मीद और सुरक्षा दोनों का प्रतीक।

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

श्री कालभैरव प्राकट्योत्सव की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिकार्तिक, कृष्ण अष्टमी
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
आराध्य देवभगवान कालभैरव
माह पद्धतिपूर्णिमांत (उत्तर भारत)
अमांत माह (दक्षिण/महा./गुज.)कार्तिक
अंतिम संशोधन05 Sep 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। यह तिथि पूर्णिमांत पंचांग (उत्तर भारत) के अनुसार है, जिसमें यह मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष में आती है। दक्षिण भारत, महाराष्ट्र और गुजरात में प्रचलित अमांत पंचांग में यही दिन कार्तिक माह में गिना जाता है — तिथि और पर्व वही रहते हैं, केवल माह का नाम भिन्न होता है। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा शास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2026 में श्री कालभैरव प्राकट्योत्सव 1 दिसंबर 2026 (मंगलवार) को है।
श्री कालभैरव प्राकट्योत्सव कार्तिक, कृष्ण अष्टमी तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
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अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।