मार्गशीर्ष, जिसे अगहन या अग्रहायण भी कहते हैं, हिन्दू पंचांग का नवां महीना है और सामान्यतः नवंबर-दिसंबर में पड़ता है। गीता में श्रीकृष्ण ने इसे “मासानां मार्गशीर्षोऽयम्” कहकर श्रेष्ठ बताया है। मान्यता है कि सतयुग में वर्ष का आरम्भ इसी मास से हुआ था और कश्यप ऋषि ने कश्मीर की रचना भी इसी समय की थी। इस अवधि की पूर्णिमा मृगशिरा नक्षत्र से जुड़ी रहती है; इसलिए इसका नाम मार्गशीर्ष पड़ा। इस समय, रबी की नई फसल महक उठती है, अन्नकूट के भोग चढ़ाए जाते हैं तथा श्रीगणेश-पूजन से बुद्धि-विवेक की पुष्टि होती है। ठंडी हवाओं और स्वच्छ आकाश के बीच, उपवास-दान करने पर संतुलन तथा लम्बी समृद्धि की आशा की जाती है।