मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी ‘मासिक शिवरात्रि’ कहलाती है। इस पावन रात में उपासक उपवास रखते हैं, शुद्ध जल-बेलपत्र, धूप-दीप और नैवेद्य से शिवलिंग का अभिषेक करते हैं। शास्त्रों के अनुसार यह व्रत क्रोध, ईर्ष्या, अभिमान और लोभ जैसे आन्तरिक विकारों का क्षय कर साधक को महादेव की विशेष कृपा दिलाता है। निराहार-जागरण से जीवन में सुख, शांति और सद्बुद्धि का संचार होता है; गृहस्थी के क्लेश शांत होते हैं, असाध्य रोगों से राहत मिलती है और संतान-प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। विवाहित स्त्रियाँ इस व्रत से दाम्पत्य-कलह से मुक्त होकर सौहार्द अनुभव करती हैं, जबकि साधक का हर अवरुद्ध कार्य महादेव की अनुकम्पा से सिद्ध हो जाता है।