धनु संक्रांति वह क्षण है जब सूर्यदेव वृश्चिक से निकलकर गुरु‑बृहस्पति की धनु राशि में प्रवेश करते हैं, सामान्यतः 16 दिसंबर को। इसी से नवाँ सूर्य‑मास ‘धनुर्मास’ आरम्भ होता है, जो पौष की मकर संक्रांति तक चलता है। इस माह को ‘मालमास’ भी कहते हैं; विवाह‑गृहप्रवेश जैसे मंगलकर्म वर्जित रहते हैं, जबकि जप‑तप, भागवत‑कथा और गो‑दान परम फलदायी माने गए हैं। दक्षिण भारत में इसे ‘मार्गशीर्षी’ स्नान और वैकुण्ठ एकादशी के लिए प्रसिद्ध मानकर तीर्थयात्राएँ होती हैं। शास्त्रों के अनुसार धनुर्मास के ब्रह्ममुहूर्त में ‘आदित्य हृदय स्तोत्र’ का पाठ, लाल वस्त्र, ताँबा, गेहूँ और गुड़ का दान तथा घर से निकलने से पहले मुँह में थोड़ा मीठा रखकर जल पीना आरोग्य और तेज बढ़ाता है। ऐसा करने से जीवन सूर्य की भाँति आलोकित हो उठता है।