माघ की धूंधली संध्या में जब सर्द हवाएँ बसंत का आभास कराती हैं, आकाश में पहली बार झलकता शीतल चाँद चन्द्र दर्शन कहलाता है। अमावस्या के तुरन्त बाद दिखाई देने वाला यह बाल-चंद्रमा सौभाग्य और नयी शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। परम्परा कहती है कि सूर्यास्त के बाद का क्षण—जब पश्चिमी क्षितिज पर लालिमा सिमट रही हो—दर्शन के लिए सर्वोत्तम है; उसी समय चंद्रदेव की कोमल किरणें मन में शांति भरती हैं। ज्योतिष मानता है कि जन्मपत्रिका में अनुकूल चंद्र व्यक्ति को सहज यश, सफलता और समृद्धि देता है। गंगा तट पर ध्यान, श्वेत पुष्प, इत्र, घी का दीप तथा “ॐ क्षीरपुत्राय विद्महे अमृततत्त्वाय धीमहि तन्नो चन्द्रः प्रचोदयात्” मंत्र का 108 बार जाप—इनसे मानसिक स्थिरता और आध्यात्मिक तेज दोनों प्राप्त होते हैं।