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वृषभ संक्रांति

15 मई 2027 · शनिवार चैत्र, शुक्ल दशमी

वैसाख माह 2027 में वृषभ संक्रांति कब है?

संक्षिप्त उत्तर

वृषभ संक्रांति 2027 कब है?

वृषभ संक्रांति 2027 शनिवार, 15 मई 2027 को मनाई जाएगी। वृषभ संक्रांति की तिथि चैत्र, शुक्ल दशमी है। वृषभ संक्रांति की पूजा का शुभ मुहूर्त 05:13 – 07:53 तक रहेगा।

दिनांक15 मई 2027
तिथिचैत्र, शुक्ल दशमी
पूजा मुहूर्त05:13 – 07:53
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिचैत्र, शुक्ल दशमीवैसाख माह के व्रत-त्यौहार
मुख्य देवताभगवान सूर्य
वार-देवताशनि देवशनिवार
नक्षत्रपूर्व फाल्गुनीव्याघात
संक्षिप्त परिचय

वृषभ संक्रांति का महत्व और उत्सव

वृषभ संक्रांति चैत्र, शुक्ल दशमी तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है। इस दिन भगवान सूर्य की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि एवं रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)शुक्ल दशमी
नक्षत्रपूर्व फाल्गुनी
योगव्याघात
करणतैतिल
ऋतुग्रीष्मउत्तरायण
संवत्सररौद्र
दिशा शूलपूर्वअदरक या तिल खाकर

वृषभ संक्रांति के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 03:37 – 04:25 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 05:13 – 07:53 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:27 – 12:21 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 16:48 – 17:42 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 17:48 – 19:00 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 08:33 – 10:14 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 15 May 05:31 AM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 03:37–04:25
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 05:13–07:53
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:27 – 12:21
तिथि समाप्त 15 May 12:24 PM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 17:48–19:00

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

वृषभ संक्रांति — महत्व, कथा और परंपरा

वृषभ संक्रांति का पर्व तब मनाया जाता है जब सूर्य मेष राशि से निकलकर वृषभ राशि में प्रवेश करते हैं। यह संक्रांति सामान्यतः वैसाख मास के उत्तरार्ध में आती है और ऋतु परिवर्तन का संकेत देती है। इस काल में सूर्य कुछ दिनों के लिए रोहिणी नक्षत्र में स्थित रहते हैं, जिससे भीषण गर्मी का दौर आरंभ होता है। इसी अवधि को नवतपा कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस समय जलदान, प्याऊ लगाना और प्यासों को पानी पिलाना अत्यंत पुण्यदायी होता है। वृषभ संक्रांति के दिन भगवान शिव के ऋषभ रूद्र स्वरूप और सूर्यदेव की पूजा करना विशेष फल प्रदान करने वाला माना गया है। यह पर्व सेवा, संयम और प्रकृति के साथ संतुलन का स्मरण कराता है।

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

वृषभ संक्रांति की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिचैत्र, शुक्ल दशमी
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
आराध्य देवभगवान सूर्य
माह पद्धतिपूर्णिमांत (उत्तर भारत)
अंतिम संशोधन05 Sep 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा शास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2027 में वृषभ संक्रांति 15 मई 2027 (शनिवार) को है।
वृषभ संक्रांति चैत्र, शुक्ल दशमी तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
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अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।