कूर्म प्राकट्योत्सव वैसाख मास की पूर्णिमा तिथि को श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। वैसाख का महीना स्थिरता, निर्माण और धर्मकर्म के लिए विशेष माना जाता है। इसी पावन तिथि पर भगवान विष्णु ने कच्छप अर्थात कूर्म अवतार धारण किया था। पौराणिक कथा के अनुसार समुद्र मंथन के समय भगवान विष्णु ने विशाल कूर्म रूप में मंदार पर्वत को अपनी पीठ पर धारण कर देवताओं और दानवों को सहारा दिया था। विष्णु पुराण में वर्णित है कि इसी मंथन से चौदह रत्नों की प्राप्ति हुई। शास्त्रों में कूर्म प्राकट्योत्सव को निर्माण कार्यों के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। इस दिन भूमि पूजन, गृह निर्माण और वास्तु दोष निवारण के उपाय विशेष फलदायी माने जाते हैं।