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कूर्म प्राकट्योत्सव

19 मई 2027 · बुधवार वैशाख, शुक्ल चतुर्दशी

वैसाख माह 2027 में कूर्म प्राकट्योत्सव कब है?

संक्षिप्त उत्तर

कूर्म प्राकट्योत्सव 2027 कब है?

कूर्म प्राकट्योत्सव 2027 बुधवार, 19 मई 2027 को मनाई जाएगी। कूर्म प्राकट्योत्सव की तिथि वैशाख, शुक्ल चतुर्दशी है। कूर्म प्राकट्योत्सव की पूजा का शुभ मुहूर्त 05:11 – 07:52 तक रहेगा।

दिनांक19 मई 2027
तिथिवैशाख, शुक्ल चतुर्दशी
पूजा मुहूर्त05:11 – 07:52
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिवैशाख, शुक्ल चतुर्दशीवैसाख माह के व्रत-त्यौहार
मुख्य देवताभगवान विष्णु
वार-देवताभगवान गणेशबुधवार
नक्षत्रस्वातिवरीयान
संक्षिप्त परिचय

कूर्म प्राकट्योत्सव का महत्व और उत्सव

कूर्म प्राकट्योत्सव वैशाख, शुक्ल चतुर्दशी तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि एवं रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)शुक्ल चतुर्दशी
नक्षत्रस्वाति
योगवरीयान
करणवणिज
ऋतुग्रीष्मउत्तरायण
संवत्सररौद्र
दिशा शूलउत्तरधनिया या तिल खाकर

कूर्म प्राकट्योत्सव के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 03:35 – 04:23 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 05:11 – 07:52 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:27 – 12:21 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 16:50 – 17:44 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 17:50 – 19:02 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 11:54 – 13:35 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 19 May 04:02 PM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 03:35–04:23
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 05:11–07:52
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:27 – 12:21
तिथि समाप्त 20 May 04:28 PM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 17:50–19:02

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

कूर्म प्राकट्योत्सव — महत्व, कथा और परंपरा

कूर्म प्राकट्योत्सव वैसाख मास की पूर्णिमा तिथि को श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। वैसाख का महीना स्थिरता, निर्माण और धर्मकर्म के लिए विशेष माना जाता है। इसी पावन तिथि पर भगवान विष्णु ने कच्छप अर्थात कूर्म अवतार धारण किया था। पौराणिक कथा के अनुसार समुद्र मंथन के समय भगवान विष्णु ने विशाल कूर्म रूप में मंदार पर्वत को अपनी पीठ पर धारण कर देवताओं और दानवों को सहारा दिया था। विष्णु पुराण में वर्णित है कि इसी मंथन से चौदह रत्नों की प्राप्ति हुई। शास्त्रों में कूर्म प्राकट्योत्सव को निर्माण कार्यों के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। इस दिन भूमि पूजन, गृह निर्माण और वास्तु दोष निवारण के उपाय विशेष फलदायी माने जाते हैं।

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

कूर्म प्राकट्योत्सव की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिवैशाख, शुक्ल चतुर्दशी
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
आराध्य देवभगवान विष्णु
माह पद्धतिपूर्णिमांत (उत्तर भारत)
अंतिम संशोधन05 Sep 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा शास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2027 में कूर्म प्राकट्योत्सव 19 मई 2027 (बुधवार) को है।
कूर्म प्राकट्योत्सव वैशाख, शुक्ल चतुर्दशी तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
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अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।