देवी बगलामुखी प्राकट्योत्सव वैसाख मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। वैसाख का महीना साधना, तप और सिद्धि का काल माना जाता है, इसलिए इस मास में महाविद्या उपासना का विशेष महत्व है। इसी दिन माँ बगलामुखी का अवतरण हुआ था, जो स्तंभन शक्ति की अधिष्ठात्री देवी मानी जाती हैं। धार्मिक मान्यता है कि वे अपने भक्तों के भय का नाश कर शत्रुओं और नकारात्मक शक्तियों को निष्क्रिय कर देती हैं। माँ बगलामुखी का स्वरूप स्वर्णिम पीले रंग का है, इसलिए उनकी पूजा में पीले वस्त्र, पीले पुष्प और नारियल अर्पित करने का विधान है। साधक यदि श्रद्धा से देवी की मूर्ति पर पीला वस्त्र अर्पित करता है, तो बड़े से बड़े संकट भी दूर हो जाते हैं। देवी की कृपा से जीवन में विजय, स्थिरता और आत्मविश्वास प्राप्त होता है।