गंगा सप्तमी का पर्व वैसाख मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। वैसाख का महीना स्नान, दान और आत्मशुद्धि के लिए विशेष रूप से पुण्यदायी माना गया है, और इसी मास में माँ गंगा से जुड़े पर्वों का महत्व और बढ़ जाता है। इस दिन को गंगा जयंती या गंगा पूजन भी कहा जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार इसी तिथि को माँ गंगा की उत्पत्ति हुई थी और वे स्वर्गलोक से भगवान शिव की जटाओं में अवतरित हुई थीं। जान्हु ऋषि के कान से प्रवाहित होने के कारण यह तिथि जान्हु सप्तमी भी कहलाती है, और इसी से माँ गंगा का नाम जान्हवी पड़ा। गंगा सप्तमी के दिन गंगा नदी में स्नान करने या गंगाजल मिलाकर स्नान करने से पापों का नाश और दुख-क्लेशों से मुक्ति मानी जाती है। इस दिन माँ गंगा की पूजा कर शुद्धता, शांति और कल्याण की कामना की जाती है।