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तृतीय मंगला गौरी व्रत

3 अगस्त 2027 · मंगलवार श्रावण का तीसरा मंगलवार

श्रावण माह 2026 में तृतीय मंगला गौरी व्रत कब है?

संक्षिप्त उत्तर

तृतीय मंगला गौरी व्रत 2027 कब है?

तृतीय मंगला गौरी व्रत 2027 मंगलवार, 3 अगस्त 2027 को मनाई जाएगी। तृतीय मंगला गौरी व्रत की तिथि श्रावण का तीसरा मंगलवार है। तृतीय मंगला गौरी व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त 05:26 – 08:05 तक रहेगा।

दिनांक3 अगस्त 2027
तिथिश्रावण का तीसरा मंगलवार
पूजा मुहूर्त05:26 – 08:05
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिश्रावण का तीसरा मंगलवारश्रावण माह के व्रत-त्योहार
मुख्य देवतामंगला गौरी
वार-देवताहनुमान जीमंगलवार
नक्षत्रआश्लेषाव्यतीपात
संक्षिप्त परिचय

तृतीय मंगला गौरी व्रत का महत्व और उत्सव

तृतीय मंगला गौरी व्रत श्रावण का तीसरा मंगलवार तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है। इस दिन मंगला गौरी की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि एवं रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)शुक्ल प्रतिपदा
नक्षत्रआश्लेषा
योगव्यतीपात
करणबव
ऋतुवर्षादक्षिणायन
संवत्सररौद्र
दिशा शूलउत्तरगुड़ खाकर

तृतीय मंगला गौरी व्रत के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 03:50 – 04:38 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 05:26 – 08:05 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:37 – 12:30 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 16:56 – 17:49 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 17:55 – 19:07 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 15:23 – 17:02 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 17 Sep 05:00 AM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 03:50–04:38
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 05:26–08:05
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:37 – 12:30
तिथि समाप्त 18 Sep 05:00 AM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 17:55–19:07

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

तृतीय मंगला गौरी व्रत — महत्व, कथा और परंपरा

मंगला गौरी व्रत श्रावण मास के प्रत्येक मंगलवार को किया जाता है; तृतीय मंगलवार को इसका विशेष महत्त्व है। धर्मशास्त्रों के अनुसार विवाह के बाद पाँच वर्षों तक यह व्रत रखना चाहिए और पाँचवें वर्ष के अंतिम मंगलवार को उद्यापन करना श्रेयस्कर माना गया है। प्रातः स्नान कर सुहागिन महिलाएँ नए वस्त्र, चूड़ियाँ और श्रृंगार धारण कर सप्तगंध, पुष्प, सिन्दूर और ऋतु-फल से माता गौरी तथा भगवान शिव की संयुक्त आराधना करती हैं। संकल्प मंत्र—“मम पुत्रापौत्रासौभाग्यवृद्धये श्रीमंगलागौरीप्रीत्यर्थं पंचवर्षपर्यन्तं मंगलागौरीव्रतमहं करिष्ये”—का उच्चारण कर व्रत आरम्भ किया जाता है। दिन भर कथा-स्मरण, दीप-जागरण और स्तुति के बाद सायंकाल स्त्रियाँ कक्षर, घेवर अथवा लड्डू का नैवेद्य चढ़ाती हैं और सुहाग-सामग्री का दान करती हैं। 

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

तृतीय मंगला गौरी व्रत की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिश्रावण का तीसरा मंगलवार
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
आराध्य देवमंगला गौरी
माह पद्धतिपूर्णिमांत (उत्तर भारत)
अंतिम संशोधन06 Sep 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा चशास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2027 में तृतीय मंगला गौरी व्रत 3 अगस्त 2027 (मंगलवार) को है।
तृतीय मंगला गौरी व्रत श्रावण का तीसरा मंगलवार तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
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अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।