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श्री राधा अष्टमी

19 सितंबर 2026 · शनिवार भाद्रपद, शुक्ल अष्टमी

भाद्रपद माह 2026 में श्री राधा अष्टमी कब है?

संक्षिप्त उत्तर

श्री राधा अष्टमी 2026 कब है?

श्री राधा अष्टमी 2026 शनिवार, 19 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। श्री राधा अष्टमी की तिथि भाद्रपद, शुक्ल अष्टमी है। श्री राधा अष्टमी की पूजा का शुभ मुहूर्त 05:46 – 08:12 तक रहेगा।

दिनांक19 सितंबर 2026
तिथिभाद्रपद, शुक्ल अष्टमी
पूजा मुहूर्त05:46 – 08:12
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिभाद्रपद, शुक्ल अष्टमीभाद्रपद माह के व्रत-त्यौहार
मुख्य देवताराधारानी
वार-देवताशनि देवशनिवार
नक्षत्रमूलआयुष्मान
संक्षिप्त परिचय

श्री राधा अष्टमी का महत्व और उत्सव

श्री राधा अष्टमी भाद्रपद, शुक्ल अष्टमी तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है। इस दिन राधारानी की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि एवं रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)शुक्ल अष्टमी
नक्षत्रमूल
योगआयुष्मान
करणबव
ऋतुशरददक्षिणायन
संवत्सरसिद्धार्थि
दिशा शूलपूर्वअदरक या तिल खाकर

श्री राधा अष्टमी के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 04:10 – 04:58 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 05:46 – 08:12 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:27 – 12:16 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 16:20 – 17:09 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 17:10 – 18:22 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 08:48 – 10:20 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 18 Sep 01:00 PM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 04:10–04:58
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 05:46–08:12
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:27 – 12:16
तिथि समाप्त 19 Sep 03:26 PM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 17:10–18:22

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

श्री राधा अष्टमी — महत्व, कथा और परंपरा

भाद्रपद शुक्ल अष्टमी ब्रज‑भूमि में राधा अष्टमी के रूप में मनाई जाती है। बरसाने के राजा वृषभानु की सुपुत्री राधा का जन्म सावन की हरियाली थमने और शरद के उजास की आहट के बीच हुआ माना जाता है; इसलिए यह पर्व प्रेम‑रस और ऋतु‑सौंदर्य दोनों का संगम है। शास्त्रों में राधा को “कृष्ण‑वल्लभा” तथा प्रभु के प्राणों की अधिष्ठात्री कहा गया है। भक्त शुद्ध‑मन से निर्जल उपवास रखते, कमल‑दल, केसर‑चंदन और दही‑माखन अर्पित कर “राधे‑कृष्ण” का जप करते हैं। जन‑विश्वास है कि इस व्रत से आर्थिक कष्ट मिटते हैं और गृह‑लक्ष्मी सदैव विराजती है; वस्तुतः जन्माष्टमी की पूर्णता राधा अष्टमी के माधुर्य के बिना सम्भव ही नहीं मानी जाती।

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

श्री राधा अष्टमी की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिभाद्रपद, शुक्ल अष्टमी
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
आराध्य देवराधारानी
माह पद्धतिपूर्णिमांत (उत्तर भारत)
अंतिम संशोधन23 Apr 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा चशास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2026 में श्री राधा अष्टमी 19 सितंबर 2026 (शनिवार) को है।
श्री राधा अष्टमी भाद्रपद, शुक्ल अष्टमी तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
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अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।