कन्या संक्रान्ति कन्या संक्रान्ति वह समय होता है जब सूर्य सिंह राशि से निकलकर कन्या राशि में प्रवेश करता है, जिससे कन्या सूर्य मास की शुरुआत मानी जाती है। इस संक्रान्ति का संबंध अलग-अलग क्षेत्रों में विभिन्न परंपराओं से जोड़ा जाता है। पूर्वी भारत में इसे विश्वकर्मा पूजा के आसपास माना जाता है, दक्षिण भारत में इसी काल में पुरटासी मास आरम्भ होता है, जबकि उत्तर भारत में यह शरद ऋतु के आगमन का संकेत देता है। परंपरा के अनुसार इस दिन प्रातःकाल सूर्य को जल अर्पित किया जाता है, पुष्प और अक्षत समर्पित किए जाते हैं तथा सूर्य उपासना के माध्यम से स्वास्थ्य, ऊर्जा और जीवन में संतुलन की कामना की जाती है। कई स्थानों पर लोग अपने औजारों और कार्यस्थलों की पूजा भी करते हैं, जिसे कर्म के प्रति सम्मान और शुद्धता का प्रतीक माना जाता है। इस अवसर पर दान-पुण्य का भी विशेष महत्व माना गया है, विशेषकर अन्न, वस्त्र और उपयोगी वस्तुओं का दान। कुल मिलाकर, कन्या संक्रान्ति परिवर्तन, अनुशासन और नए चक्र की शुरुआत का संकेत देती है, जो जीवन में स्थिरता और संतुलन बनाए रखने की प्रेरणा देती है।