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शीतला अष्टमी

30 मार्च 2027 · मंगलवार फाल्गुन, कृष्ण अष्टमी

चैत्र माह में शीतला अष्टमी/बसोड़ा पूजा कब है?

संक्षिप्त उत्तर

शीतला अष्टमी 2027 कब है?

शीतला अष्टमी 2027 मंगलवार, 30 मार्च 2027 को मनाई जाएगी। शीतला अष्टमी की तिथि फाल्गुन, कृष्ण अष्टमी है। शीतला अष्टमी की पूजा का शुभ मुहूर्त 05:52 – 08:20 तक रहेगा।

दिनांक30 मार्च 2027
तिथिफाल्गुन, कृष्ण अष्टमी
पूजा मुहूर्त05:52 – 08:20
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिफाल्गुन, कृष्ण अष्टमीचैत्र माह के व्रत-त्योहार
वार-देवताहनुमान जीमंगलवार
नक्षत्रपूर्वाषाढ़ावरीयान
संक्षिप्त परिचय

शीतला अष्टमी का महत्व और उत्सव

शीतला अष्टमी फाल्गुन, कृष्ण अष्टमी तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)कृष्ण अष्टमी
नक्षत्रपूर्वाषाढ़ा
योगवरीयान
करणबालव
ऋतुवसन्तउत्तरायण
संवत्सररौद्र
दिशा शूलउत्तरगुड़ खाकर

शीतला अष्टमी के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 04:16 – 05:04 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 05:52 – 08:20 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:37 – 12:27 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 16:34 – 17:23 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 17:25 – 18:37 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 15:08 – 16:40 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 29 Mar 05:10 PM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 04:16–05:04
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 05:52–08:20
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:37 – 12:27
तिथि समाप्त 30 Mar 07:39 PM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 17:25–18:37

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

शीतला अष्टमी — महत्व, कथा और परंपरा

शीतला अष्टमी, जिसे बसोड़ा या बसौड़ा भी कहा जाता है, हर वर्ष होली के आठवें दिन चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। चैत्र का महीना ऋतु परिवर्तन का संकेत देता है, जब शीत ऋतु विदा लेती है और गर्मी धीरे-धीरे अपना प्रभाव दिखाने लगती है। इसी समय स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़ी शीतला माता की उपासना का विशेष महत्व माना गया है। उत्तर भारत में माता शीतला को रोगों से रक्षा करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। इस दिन बासी भोजन का भोग अर्पित किया जाता है, जिसे बसोड़ा कहा जाता है। पुराणों में वर्णित यह परंपरा संयम, आस्था और लोकविश्वास का प्रतीक मानी जाती है।

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

शीतला अष्टमी की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिफाल्गुन, कृष्ण अष्टमी
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
माह पद्धतिपूर्णिमांत (उत्तर भारत)
अमांत माह (दक्षिण/महा./गुज.)फाल्गुन
अंतिम संशोधन05 Sep 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। यह तिथि पूर्णिमांत पंचांग (उत्तर भारत) के अनुसार है, जिसमें यह चैत्र माह के कृष्ण पक्ष में आती है। दक्षिण भारत, महाराष्ट्र और गुजरात में प्रचलित अमांत पंचांग में यही दिन फाल्गुन माह में गिना जाता है — तिथि और पर्व वही रहते हैं, केवल माह का नाम भिन्न होता है। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा चशास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2027 में शीतला अष्टमी 30 मार्च 2027 (मंगलवार) को है।
शीतला अष्टमी फाल्गुन, कृष्ण अष्टमी तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
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अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।