विश्वकर्मा पूजा हर वर्ष सूर्य के सिंह से कन्या राशि में प्रवेश, कन्या संक्रांति, के दिन मनाई जाती है। पुराणों में वर्णित विश्वकर्मा वही दिव्य शिल्पी हैं जिन्होंने इन्द्रपुरी, द्वारका, हस्तिनापुर, लंका और स्वर्ग लोक जैसी अद्भुत नगरी‑रचनाएँ गढ़ीं। इस तिथि पर देश‑भर के कारखानों, कार्यशालाओं और दुकानों में औज़ार, मशीनें और वाहन धो‑पोंछकर रोली‑अक्षत, पुष्प व धूप से पूजित होते हैं ताकि यांत्रिक दोष मिटें और उत्पादन बढ़े। इंजीनियर, बढ़ई, लोहार, तकनीकी कर्मी, सभी उपकरणों को देवप्रतिमा‑समान मानकर आदर देते हैं, यह विश्वास रखते हुए कि विश्वकर्मा‑कृपा से व्यवसाय फलता‑फूलता है, कार्य‑कुशलता बढ़ती है और मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। इस प्रकार विश्वकर्मा पूजा उद्योग, कला और परिश्रम के प्रति सामूहिक कृतज्ञता का सांस्कृतिक उत्सव बन चुकी है।