श्री आदिशंकराचार्य प्राकट्योत्सव वैसाख मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। वैसाख का महीना साधना, ज्ञान और वैराग्य से जुड़ा माना जाता है, इसलिए इस मास में आदिगुरु शंकराचार्य का स्मरण विशेष अर्थ रखता है। आदि शंकराचार्य का जन्म केरल के कालड़ी में एक नंबूदरी ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उन्हें भगवान शंकर का अवतार माना जाता है। आदि शंकराचार्य अद्वैत वेदांत के संस्थापक और महान हिंदू धर्म प्रचारक थे। उन्होंने जीवनभर सनातन धर्म के जीर्णोद्धार और वेदांत के प्रचार में स्वयं को समर्पित रखा। उनके प्रयासों से हिंदू धर्म को नई चेतना और दार्शनिक दृढ़ता प्राप्त हुई। वे जगद्गुरु और शंकर भगवद्पादाचार्य के नाम से भी प्रसिद्ध हैं। उनका अद्वैत दर्शन भारतीय संस्कृति में ज्ञान और धर्म का आधार माना जाता है।