महाकवि सूरदास जयंती वैसाख मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है। वैसाख का महीना भक्ति, साधना और वैष्णव परंपरा के लिए विशेष माना जाता है, इसलिए इस मास में सूरदास जी का स्मरण अत्यंत अर्थपूर्ण है। भगवान श्रीकृष्ण की अनन्य भक्ति में रचे उनके पद, भजन और काव्य आज भी जनमानस को भावविभोर कर देते हैं। सूरदास जी का जन्म सन् 1478 में पंडित रामदास सारस्वत के परिवार में माना जाता है। कुछ मत आगरा के रुनकता को जन्मस्थल बताते हैं, जबकि कुछ हरियाणा के सीही गाँव का उल्लेख करते हैं। वल्लभाचार्य जी से दीक्षा प्राप्त कर वे पुष्टिमार्ग से जुड़े और श्रीनाथ जी के मंदिर में लीला-गान का दायित्व निभाया। उनका काव्य कृष्ण प्रेम, वात्सल्य और भक्ति का अनुपम उदाहरण है।