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नरसिंह द्वादशी

19 मार्च 2027 · शुक्रवार फाल्गुन, शुक्ल द्वादशी

फाल्गुन माह 2027 में नरसिंह द्वादशी कब है?

संक्षिप्त उत्तर

नरसिंह द्वादशी 2027 कब है?

नरसिंह द्वादशी 2027 शुक्रवार, 19 मार्च 2027 को मनाई जाएगी। नरसिंह द्वादशी की तिथि फाल्गुन, शुक्ल द्वादशी है। नरसिंह द्वादशी की पूजा का शुभ मुहूर्त 06:03 – 08:28 तक रहेगा।

दिनांक19 मार्च 2027
तिथिफाल्गुन, शुक्ल द्वादशी
पूजा मुहूर्त06:03 – 08:28
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिफाल्गुन, शुक्ल द्वादशीफाल्गुन माह के व्रत-त्यौहार
मुख्य देवताभगवान नरसिंह
वार-देवतामाँ लक्ष्मी · माँ संतोषीशुक्रवार
नक्षत्रआश्लेषासुकर्मा
संक्षिप्त परिचय

नरसिंह द्वादशी का महत्व और उत्सव

नरसिंह द्वादशी फाल्गुन, शुक्ल द्वादशी तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है। इस दिन भगवान नरसिंह की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि एवं रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)शुक्ल द्वादशी
नक्षत्रआश्लेषा
योगसुकर्मा
करणबव
ऋतुवसन्तउत्तरायण
संवत्सररौद्र
दिशा शूलपश्चिमजौ या दही खाकर

नरसिंह द्वादशी के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 04:27 – 05:15 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 06:03 – 08:28 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:41 – 12:30 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 16:32 – 17:20 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 17:21 – 18:33 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 10:35 – 12:05 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 19 Mar 01:51 AM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 04:27–05:15
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 06:03–08:28
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:41 – 12:30
तिथि समाप्त 19 Mar 11:17 PM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 17:21–18:33

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

नरसिंह द्वादशी — महत्व, कथा और परंपरा

फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को नरसिंह द्वादशी के रूप में मनाया जाता है। भगवान विष्णु के प्रमुख अवतारों में से एक, नरसिंह अवतार का इस दिन विशेष महत्व है। इस अवतार में भगवान श्रीहरि विष्णु ने आधे मनुष्य और आधे सिंह का रूप धारण कर अत्याचारी दैत्यराज हिरण्यकशिपु का वध किया था और धर्म की रक्षा की थी। इस दिन घर के मुख्य द्वार तथा अन्य दरवाजों पर रोली से तिलक लगाना शुभ माना जाता है। साथ ही, भगवान विष्णु का स्मरण करते हुए उनके द्वारा जीवन में प्रदान की गई कृपा के लिए कृतज्ञता व्यक्त करनी चाहिए। यह दिन भक्ति और आस्था के साथ भगवान का आभार प्रकट करने का भी अवसर है। नरसिंह द्वादशी का व्रत करने से मनुष्य को सांसारिक सुखों के साथ-साथ मोक्ष की प्राप्ति भी होती है। इस दिन “ॐ वज्रनखाय विद्महे तीक्ष्ण दंष्ट्राय धीमहि तन्नो नृसिंह प्रचोदयात” मंत्र का जप करना अत्यंत फलदायक माना गया है, जिससे भय, बाधाएं और नकारात्मक शक्तियाँ दूर होती हैं तथा जीवन में साहस और संरक्षण का आशीर्वाद मिलता है।

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

नरसिंह द्वादशी की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिफाल्गुन, शुक्ल द्वादशी
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
आराध्य देवभगवान नरसिंह
माह पद्धतिपूर्णिमांत (उत्तर भारत)
अंतिम संशोधन05 Sep 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा शास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2027 में नरसिंह द्वादशी 19 मार्च 2027 (शुक्रवार) को है।
नरसिंह द्वादशी फाल्गुन, शुक्ल द्वादशी तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
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अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।