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होलाष्टक

16 मार्च 2027 · मंगलवार फाल्गुन, शुक्ल अष्टमी

फाल्गुन माह 2027 में होलाष्टक कब है?

संक्षिप्त उत्तर

होलाष्टक 2027 कब है?

होलाष्टक 2027 मंगलवार, 16 मार्च 2027 को मनाई जाएगी। होलाष्टक की तिथि फाल्गुन, शुक्ल अष्टमी है। होलाष्टक की पूजा का शुभ मुहूर्त 06:06 – 08:30 तक रहेगा।

दिनांक16 मार्च 2027
तिथिफाल्गुन, शुक्ल अष्टमी
पूजा मुहूर्त06:06 – 08:30
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिफाल्गुन, शुक्ल अष्टमीफाल्गुन माह के व्रत-त्यौहार
मुख्य देवता श्रीकृष्ण
वार-देवताहनुमान जीमंगलवार
नक्षत्रमृगशिराआयुष्मान
संक्षिप्त परिचय

होलाष्टक का महत्व और उत्सव

होलाष्टक फाल्गुन, शुक्ल अष्टमी तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है। इस दिन श्रीकृष्ण की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि एवं रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)शुक्ल अष्टमी
नक्षत्रमृगशिरा
योगआयुष्मान
करणबव
ऋतुवसन्तउत्तरायण
संवत्सरसिद्धार्थि
दिशा शूलउत्तरगुड़ खाकर

होलाष्टक के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 04:30 – 05:18 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 06:06 – 08:30 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:42 – 12:30 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 16:30 – 17:18 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 17:19 – 18:31 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 15:06 – 16:37 शुभ कार्य में टालें सावधानी
होलाष्टक प्रारंभ 16 Mar 05:00 AM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 04:30–05:18
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 06:06–08:30
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:42 – 12:30
होलाष्टक समापन 23 Mar 05:00 AM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 17:19–18:31

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

होलाष्टक — महत्व, कथा और परंपरा

प्रत्येक वर्ष फाल्गुन शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से होलाष्टक का आरंभ होता है और इसका समापन होलिका दहन के दिन होता है। इस अवधि को धार्मिक दृष्टि से विशेष माना जाता है। इस दिन संतान प्राप्ति की कामना से लड्डू गोपाल की पूजा करते समय हवन करना शुभ माना जाता है, साथ ही श्रीकृष्ण के मंत्र “कृं कृष्णाय नमः” का जाप करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि होलाष्टक के प्रारंभ के दिन ही भगवान शिव ने कामदेव को भस्म कर दिया था, जिसके कारण इस काल में सभी ग्रह उग्र अवस्था में माने जाते हैं। इसलिए इस दौरान जन्म और मृत्यु से संबंधित अनिवार्य कार्यों को छोड़कर अन्य कोई भी शुभ या मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। होलाष्टक के दिनों में पूजा-पाठ, भजन और भगवान के स्मरण को अत्यंत फलदायक माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय विवाह, गृह प्रवेश, वाहन या घर की खरीद जैसे मांगलिक कार्यों से परहेज करना चाहिए, क्योंकि यह काल इन कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माना जाता।

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

होलाष्टक की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिफाल्गुन, शुक्ल अष्टमी
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
आराध्य देवश्रीकृष्ण
माह पद्धतिपूर्णिमांत (उत्तर भारत)
अंतिम संशोधन05 Sep 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा शास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2027 में होलाष्टक 16 मार्च 2027 (मंगलवार) को है।
होलाष्टक फाल्गुन, शुक्ल अष्टमी तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
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अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।