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जीवित्पुत्रिका व्रत

3 अक्टूबर 2026 · शनिवार भाद्रपद, कृष्ण सप्तमी

आश्विन माह 2026 में जीवित्पुत्रिका व्रत कब है?

संक्षिप्त उत्तर

जीवित्पुत्रिका व्रत 2026 कब है?

जीवित्पुत्रिका व्रत 2026 शनिवार, 3 अक्टूबर 2026 को मनाई जाएगी। जीवित्पुत्रिका व्रत की तिथि भाद्रपद, कृष्ण सप्तमी है। जीवित्पुत्रिका व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त 05:51 – 08:13 तक रहेगा।

दिनांक3 अक्टूबर 2026
तिथिभाद्रपद, कृष्ण सप्तमी
पूजा मुहूर्त05:51 – 08:13
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिभाद्रपद, कृष्ण सप्तमीआश्विन माह के व्रत-त्यौहार
वार-देवताशनि देवशनिवार
नक्षत्रआर्द्रावरीयान
संक्षिप्त परिचय

जीवित्पुत्रिका व्रत का महत्व और उत्सव

जीवित्पुत्रिका व्रत भाद्रपद, कृष्ण सप्तमी तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)कृष्ण सप्तमी
नक्षत्रआर्द्रा
योगवरीयान
करणबव
ऋतुशरददक्षिणायन
संवत्सरसिद्धार्थि
दिशा शूलपूर्वअदरक या तिल खाकर

जीवित्पुत्रिका व्रत के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 04:15 – 05:03 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 05:51 – 08:13 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:23 – 12:10 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 16:08 – 16:55 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 16:55 – 18:07 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 08:49 – 10:18 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 03 Oct 07:59 AM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 04:15–05:03
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 05:51–08:13
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:23 – 12:10
तिथि समाप्त 04 Oct 05:51 AM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 16:55–18:07

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

जीवित्पुत्रिका व्रत — महत्व, कथा और परंपरा

जीवित्पुत्रिका व्रत, जिसे जिउतिया भी कहा जाता है, जीवित्पुत्रिका व्रत आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाने वाला एक महत्वपूर्ण व्रत है। यह मातृत्व के संकल्प, संयम और करुणा का प्रतीक माना जाता है। व्रत का क्रम तीन दिनों तक चलता है: पहले दिन माताएँ स्नान के बाद सादा शाक-भात ग्रहण करती हैं (नहाय-खाय), दूसरे दिन निर्जला उपवास रखकर दिन भर पूजा-पाठ करती हैं और जीमूतवाहन की कथा सुनती-सुनाती हैं, तथा तीसरे दिन नवमी तिथि में पारंपरिक भोजन जैसे पसहरी भात और कद्दू-भुजिया से पारण करती हैं। पूजा के दौरान फल, मिठाई और अन्य सामग्री अर्पित की जाती है। लोक-विश्वास है कि इस व्रत से संतान को रोग, संकट और अकाल-मृत्यु से रक्षा मिलती है तथा उनकी आयु, स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

जीवित्पुत्रिका व्रत की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिभाद्रपद, कृष्ण सप्तमी
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
माह पद्धतिपूर्णिमांत (उत्तर भारत)
अमांत माह (दक्षिण/महा./गुज.)भाद्रपद
अंतिम संशोधन05 Sep 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। यह तिथि पूर्णिमांत पंचांग (उत्तर भारत) के अनुसार है, जिसमें यह आश्विन माह के कृष्ण पक्ष में आती है। दक्षिण भारत, महाराष्ट्र और गुजरात में प्रचलित अमांत पंचांग में यही दिन भाद्रपद माह में गिना जाता है — तिथि और पर्व वही रहते हैं, केवल माह का नाम भिन्न होता है। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा शास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2026 में जीवित्पुत्रिका व्रत 3 अक्टूबर 2026 (शनिवार) को है।
जीवित्पुत्रिका व्रत भाद्रपद, कृष्ण सप्तमी तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
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अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।