जीवित्पुत्रिका व्रत, जिसे जिउतिया भी कहा जाता है, जीवित्पुत्रिका व्रत आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाने वाला एक महत्वपूर्ण व्रत है। यह मातृत्व के संकल्प, संयम और करुणा का प्रतीक माना जाता है। व्रत का क्रम तीन दिनों तक चलता है: पहले दिन माताएँ स्नान के बाद सादा शाक-भात ग्रहण करती हैं (नहाय-खाय), दूसरे दिन निर्जला उपवास रखकर दिन भर पूजा-पाठ करती हैं और जीमूतवाहन की कथा सुनती-सुनाती हैं, तथा तीसरे दिन नवमी तिथि में पारंपरिक भोजन जैसे पसहरी भात और कद्दू-भुजिया से पारण करती हैं। पूजा के दौरान फल, मिठाई और अन्य सामग्री अर्पित की जाती है। लोक-विश्वास है कि इस व्रत से संतान को रोग, संकट और अकाल-मृत्यु से रक्षा मिलती है तथा उनकी आयु, स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।