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भाद्रपद बहुला चतुर्थी

20 अगस्त 2027 · शुक्रवार श्रावण, कृष्ण तृतीया

भाद्रपद माह 2026 में बहुला चतुर्थी कब है?

संक्षिप्त उत्तर

भाद्रपद बहुला चतुर्थी 2027 कब है?

भाद्रपद बहुला चतुर्थी 2027 शुक्रवार, 20 अगस्त 2027 को रखा जाएगा। भाद्रपद बहुला चतुर्थी की तिथि श्रावण, कृष्ण तृतीया है, और इस दिन श्रीकृष्ण और श्रीगणेश की पूजा की जाती है। भाद्रपद बहुला चतुर्थी की पूजा का शुभ मुहूर्त 05:38 – 08:10 तक रहेगा।

दिनांक20 अगस्त 2027
तिथिश्रावण, कृष्ण तृतीया
पूजा मुहूर्त05:38 – 08:10
व्रत जानकारी

व्रत सारांश

मुख्य तिथिश्रावण, कृष्ण तृतीयाभाद्रपद माह के व्रत-त्यौहार
मुख्य देवताश्रीकृष्ण और श्रीगणेश
वार-देवताशिव जीशुक्रवार
नक्षत्ररेवतीगण्ड
संक्षिप्त परिचय

भाद्रपद बहुला चतुर्थी का महत्व और पूजा विधि

भाद्रपद बहुला चतुर्थी श्रावण, कृष्ण तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू व्रत है। इस दिन श्रीकृष्ण और श्रीगणेश की पूजा की जाती है और सुख-समृद्धि एवं रक्षा की प्रार्थना की जाती है।

पंचांग विवरण

व्रत का पंचांग और पारण

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)कृष्ण तृतीया
नक्षत्ररेवती
योगगण्ड
करणविष्टि
ऋतुशरददक्षिणायन
संवत्सरसिद्धार्थि
दिशा शूलपूर्वदर्पण देखकर या दूध पीकर

भाद्रपद बहुला चतुर्थी के दिन पूजन और दान का शुभ मुहूर्त

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 04:02 – 04:50 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 05:38 – 08:10 व्रत संकल्प और पूजा श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:33 – 12:23 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 16:36 – 17:27 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 17:30 – 18:42 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 07:13 – 08:48 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 20 Aug 08:50 AM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 04:02–04:50
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 05:38–08:10
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:33 – 12:23
तिथि समाप्त 21 Aug 07:41 AM
पारण (सूर्योदय उपरांत) 21 Aug 05:38–08:10

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

भाद्रपद बहुला चतुर्थी — विवरण, नियम और महत्व

भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को बहुला चतुर्थी—या बहुला गणेश चतुर्थी—कहा जाता है। श्रीकृष्ण ने इस तिथि को गौ-पूजन का विशेष दिवस घोषित किया, इसलिए आज के दिन गाय का दूध तथा उससे बने पदार्थ ग्रहण नहीं किए जाते, ताकि गौमाता का सम्मान हो सके। प्रातः स्नान के बाद व्रतधारी श्रीकृष्ण और श्रीगणेश की संयुक्त आराधना करते हैं; मान्यता है कि इससे वर्ष भर की समस्त चतुर्थियों का पुण्य एक साथ प्राप्त होता है। भाद्रपद की मंद होती वर्षा, हरे-भरे धान के खेत और श्रमरत कृषकों के बीच मनाया जाने वाला यह व्रत हमारी कृषि संस्कृति और गो-संरक्षण के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है।

विभिन्न नाम

भाद्रपद बहुला चतुर्थी के विभिन्न नाम क्या हैं?

क्षेत्र / परंपरानाम
—bhadwa ki chauth
—भाद्रपद चौथ व्रत
—bhado chauth
—bahura
—भादवा की चौथ
—bhado chauth
—भादुड़ी चौथ
—बहुरा
—badi chauth
विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

भाद्रपद बहुला चतुर्थी की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिश्रावण, कृष्ण तृतीया
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
आराध्य देवश्रीकृष्ण और श्रीगणेश
माह पद्धतिपूर्णिमांत (उत्तर भारत)
अंतिम संशोधन05 Sep 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा चशास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

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सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2027 में भाद्रपद बहुला चतुर्थी 20 अगस्त 2027 (शुक्रवार) को है।
भाद्रपद बहुला चतुर्थी श्रावण, कृष्ण तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
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अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।