भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को बहुला चतुर्थी—या बहुला गणेश चतुर्थी—कहा जाता है। श्रीकृष्ण ने इस तिथि को गौ-पूजन का विशेष दिवस घोषित किया, इसलिए आज के दिन गाय का दूध तथा उससे बने पदार्थ ग्रहण नहीं किए जाते, ताकि गौमाता का सम्मान हो सके। प्रातः स्नान के बाद व्रतधारी श्रीकृष्ण और श्रीगणेश की संयुक्त आराधना करते हैं; मान्यता है कि इससे वर्ष भर की समस्त चतुर्थियों का पुण्य एक साथ प्राप्त होता है। भाद्रपद की मंद होती वर्षा, हरे-भरे धान के खेत और श्रमरत कृषकों के बीच मनाया जाने वाला यह व्रत हमारी कृषि संस्कृति और गो-संरक्षण के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है।