भगवान शिव और माँ पार्वती के पुत्र कार्तिकेय जी को स्कंद के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि उनका जन्म अमावस्या के दिन महादेव के दिव्य तेज से हुआ और वे चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को प्रकट हुए। इसी कारण यह तिथि स्कंद षष्ठी के रूप में विशेष महत्व रखती है। स्कंद षष्ठी के दिन भगवान कार्तिकेय की श्रद्धापूर्वक पूजा और व्रत करने से जीवन की कठिनाइयाँ दूर होती हैं तथा सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। वे युद्ध, शक्ति और ऊर्जा के प्रतीक माने जाते हैं। इस दिन भगवान शिव, माँ पार्वती और कार्तिकेय जी की एक साथ पूजा करने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ, विवाद और कलह से मुक्ति मिलती है। पूजा-विधि में गौघृत का दीपक जलाकर उसमें साबुत धनिया के बीज डाले जाते हैं, धूप अर्पित की जाती है और पीले कनेर के फूल चढ़ाए जाते हैं। इस प्रकार विधि-विधान से की गई आराधना से भगवान कार्तिकेय की विशेष कृपा प्राप्त होती है।