बैसाखी का पर्व मेष संक्रांति को मनाया जाता है और इसका विशेष महत्व पंजाब, हरियाणा तथा उत्तर भारत में देखा जाता है। यह पर्व मुख्य रूप से फसल कटाई से जुड़ा हुआ है, जब खेतों में नई उपज के आने से किसानों के जीवन में उल्लास और संतोष का भाव होता है। असम में इसी अवसर को बिहू के रूप में मनाया जाता है, जबकि बंगाल में इसे पोइला बैसाख कहा जाता है, जहाँ यह सौर नववर्ष का प्रतीक है। मेष संक्रांति के समय पर्वतीय क्षेत्रों में मेलों का आयोजन होता है और देवी-देवताओं की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन माँ गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था, इसलिए पवित्र नदियों में स्नान का विशेष महत्व है। गंगा तट पर जाकर माँ गंगा की आरती करना इस दिन शुभ माना जाता है। बैसाखी प्रकृति, परिश्रम और आस्था के सामंजस्य का पर्व है।