हिन्दू व्रत एवं त्यौहार - BhaktiSarovar.in

गुड़ी पड़वा

7 अप्रैल 2027 · बुधवार फाल्गुन, शुक्ल प्रतिपदा

हिंदू नव वर्ष गुड़ी पड़वा कब है?

संक्षिप्त उत्तर

गुड़ी पड़वा 2027 कब है?

गुड़ी पड़वा 2027 बुधवार, 7 अप्रैल 2027 को मनाई जाएगी। गुड़ी पड़वा की तिथि फाल्गुन, शुक्ल प्रतिपदा है। गुड़ी पड़वा की पूजा का शुभ मुहूर्त 05:44 – 08:14 तक रहेगा।

दिनांक7 अप्रैल 2027
तिथिफाल्गुन, शुक्ल प्रतिपदा
पूजा मुहूर्त05:44 – 08:14
पर्व जानकारी

पर्व सारांश

मुख्य तिथिफाल्गुन, शुक्ल प्रतिपदाचैत्र माह के व्रत-त्योहार
वार-देवताभगवान गणेशबुधवार
नक्षत्ररेवतीइन्द्र
संक्षिप्त परिचय

गुड़ी पड़वा का महत्व और उत्सव

गुड़ी पड़वा फाल्गुन, शुक्ल प्रतिपदा तिथि को मनाया जाने वाला हिंदू पर्व है।

पंचांग विवरण

त्योहार का पंचांग और शुभ समय

मुख्य पंचांग विवरण

तिथि (सूर्योदय)शुक्ल प्रतिपदा
नक्षत्ररेवती
योगइन्द्र
करणकिंस्तुघ्न
ऋतुवसन्तउत्तरायण
संवत्सररौद्र
दिशा शूलउत्तरधनिया या तिल खाकर

गुड़ी पड़वा के दिन पूजा, स्नान और दान का शुभ समय

मुहूर्त / योगसमयउपयोगस्थिति
ब्रह्म मुहूर्त 04:08 – 04:56 स्नान, जप, संकल्प शुभ
प्रातः पूजन 05:44 – 08:14 पूजा और संकल्प श्रेष्ठ
अभिजीत मुहूर्त 11:35 – 12:25 सामान्य शुभ कार्य शुभ
विजय मुहूर्त 16:36 – 17:26 कार्य-सिद्धि, संकल्प शुभ
सन्ध्या पूजन 17:29 – 18:41 दीप, आरती, कथा शुभ
राहु काल (वर्ज्य) 12:00 – 13:34 शुभ कार्य में टालें सावधानी
तिथि शुरू 07 Apr 05:20 AM
ब्रह्म मुहूर्त जप / स्नान 04:08–04:56
प्रातः पूजा मुख्य संकल्प 05:44–08:14
अभिजीत शुभ मुहूर्त 11:35 – 12:25
तिथि समाप्त 08 Apr 04:28 AM
सन्ध्या पूजन दीप, आरती 17:29–18:41

समय वाराणसी के सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित हैं; स्थान अनुसार थोड़ा अंतर संभव है।

पर्व विवरण

गुड़ी पड़वा — महत्व, कथा और परंपरा

गुड़ी पड़वा का पर्व चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है। चैत्र महीना वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक है, जब प्रकृति नवजीवन और उल्लास से भर उठती है। इसी दिन हिंदू पंचांग के अनुसार नवसंवत्सर का आरंभ माना जाता है। गुड़ी’ का अर्थ ध्वज या विजय पताका से है और ‘पड़वा’ प्रतिपदा तिथि को कहा जाता है। इस अवसर पर घरों को स्वच्छ कर आम के पत्तों की बंदनवार से सजाया जाता है और घर के बाहर गुड़ी स्थापित की जाती है। महाराष्ट्र में यह पर्व विशेष उत्साह से मनाया जाता है, साथ ही कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और दक्षिण भारत के अन्य क्षेत्रों में भी इसका महत्व है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन भगवान राम अयोध्या लौटे थे और युधिष्ठिर का राज्याभिषेक हुआ था। इसे सृष्टि के आरंभ और सतयुग की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।

विश्वसनीयता एवं प्रामाणिकता

गुड़ी पड़वा की तिथि कैसे निर्धारित हुई?

पंचांग-सत्यापित
पंचांग तिथिफाल्गुन, शुक्ल प्रतिपदा
गणना का आधारतिथि-आधारित (चंद्र-सौर)
गणना पद्धतिदृक् गणित (Meeus)
संदर्भ स्थानउज्जैन
माह पद्धतिपूर्णिमांत (उत्तर भारत)
अंतिम संशोधन05 Sep 2026

तिथि का निर्धारण सूर्योदय के समय प्रचलित तिथि से होता है, और सूर्योदय प्रत्येक नगर में भिन्न होता है — इसलिए स्थान बदलने पर तारीख़ में एक दिन का अंतर संभव है। इसी कारण Bhakti Sarovar पर समय एक राष्ट्रीय औसत नहीं, बल्कि आपके चुने हुए नगर के वास्तविक सूर्योदय के अनुसार गणना किए जाते हैं। पूरी गणना पद्धति पढ़ें →

इस पृष्ठ के योगदानकर्ता
प्रमूल लेखनप्रियंका शर्मा शास्त्रीय सत्यापनचन्द्रभूषण मणि त्रिपाठी दीसंपादकीय समीक्षादीपक शर्मा

गूगल पर भक्ति सरोवर को पसंदीदा स्रोत बनाएं

1गूगल पर खोजें 2हमारा लिंक ढूँढें, ⋮ मेनू दबाएं 3"More from this site" चुनें पसंदीदा स्रोत बनाएं →
सामान्य प्रश्न

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2027 में गुड़ी पड़वा 7 अप्रैल 2027 (बुधवार) को है।
गुड़ी पड़वा फाल्गुन, शुक्ल प्रतिपदा तिथि को मनाया जाने वाला पर्व है।
!

अस्वीकरण

इस लेख में बताए गए उपाय/लाभ/सलाह केवल सामान्य सूचना हेतु हैं। भक्ति सरोवर इनका समर्थन नहीं करता। जानकारी विभिन्न पंचांग, प्रवचनों, मान्यताओं और धर्मग्रंथों से संग्रहित है। कृपया अपने विवेक का उपयोग करें।