आषाढ़, शुक्ल द्वादशी

वासुदेव द्वादशी

25 Jul 2026, 05:04 PM Ujjain शनिवार
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वासुदेव द्वादशी कब है?

देवशयनी एकादशी के अगले दिन, आषाढ़ शुक्ल द्वादशी को वासुदेव द्वादशी का व्रत रखा जाता है। यह तिथि भगवान श्रीकृष्ण के पितृ-युग्म वासुदेव-देवकी को समर्पित है। चातुर्मास के आरम्भिक दिनों में आने वाला यह व्रत विष्णुभक्तों के लिए विशेष महत्त्व रखता है। श्रद्धालु दिन भर उपवास रखते हैं और संध्या बेला में कमल-पुष्प, तुलसी-पत्र, दूध, दही, घी, मधु तथा गुड़ से बने पंचामृत द्वारा श्रीहरि तथा महालक्ष्मी का षोडशोपचार पूजन करते हैं। व्रत-कथा सुनकर श्रीविष्णु सहस्रनाम या “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप किया जाता है। मान्यता है कि वासुदेव-पूजन से जीवन के समस्त कष्ट शांत होते हैं, परिवार में कल्याण आता है और साधक को स्थायी सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

अंतिम अपडेट: 20 May 2026 25 Jul 2026
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